एफसीआरए से लेकर नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन बिल पर तमिलनाडु के 37 सांसद क्या रुख लेंगे, इस पर सबकी नजर है। असल में राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के सभी 57 सांसदों, 39 लोकसभा और 18 राज्यसभा, की बैठक बुलाई थी। इस बैठक से 37 सांसद गैरहाजिर रहे। डीएमके के 22 लोकसभा और आठ राज्यसभा सांसद इस बैठक में नहीं पहुंचे। उनके अलावा अन्ना डीएमके के सभी चार राज्यसभा सांसद और तीन अन्य पार्टियों डीएमडीके, पीएमके और एमएनएम के सांसद भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस के साथ जितनी पार्टियां टीवीके और मुख्यमंत्री विजय का समर्थन कर रही हैं उनके 20 सांसद बैठक में शामिल हुए।
इन 20 सांसदों ने अपना रुख साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि वे महिला आरक्षण बिल में संशोधन और परिसीमन का समर्थन नहीं करेंगे। सरकार के साथ इनकी बातचीत होने और सहमति बनाने में भी मुश्किल होगी क्योंकि इनका स्टैंड कांग्रेस वाला है और विजय निश्चित रूप से डीएमके की राय से अलग राय रखेंगे। ऊपर से इन सांसदों ने एक स्वर में कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या हमेशा के लिए 543 पर फ्रीज की जाए। कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध करने के लिए यह तर्क दिया कि संसद की बैठकें कम होती हैं और जितने सांसद हैं उनको ही बोलने का मौका नहीं मिलता है। अगर 815 या 850 लोकसभा सांसद हो जाएंगे तो फिर किसी को बोलने का मौका नहीं मिलेगा। लेकिन यह तर्क बहुत दमदार नहीं है। अगर संख्या बढ़ती है तो सरकार पर दबाव डाल कर सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है। पहले संसद की बैठकें ज्यादा होती थीं, जो आज काफी कम हो गई हैं।
