यह लाख टके का सवाल है कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह क्या करेंगे? अमरिंदर सिंह खुद स्वस्थ नहीं हैं और अब सक्रिय राजनीति करने की स्थिति में नहीं हैं। वे कांग्रेस छोड़ कर इसलिए भाजपा में गए थे ताकि कहीं राज्यपाल वगैरह बन जाएंगे और पत्नी और बेटे को राजनीतिक ठिकाना मिल जाएगा। लेकिन इनमें से कुछ नहीं हुआ। अभी उनके परिवार से न तो कोई सांसद है और न विधायक है। तभी पिछले दिनों उन्होंने कहा कि वे भाजपा छोड़ सकते हैं क्योंकि भाजपा में प्रदेश का कोई नेता उनकी बात नहीं सुनता है और न उनसे कोई सलाह लिया जाता है।
जिस दिन कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने भाजपा छोड़ने की बात कही उसी दिन से उनके कांग्रेस में लौटने की चर्चा शुरू हो गई। कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने उनका कांग्रेस में स्वागत करने की बात भी कह दी। इसके तुरंत बाद ईडी का एक नोटिस अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह को मिल गया। विदेशी संपत्ति से लाभ कमाने और उसे छिपाने के मामले में नोटिस दिया गया। इसके तुरंत बाद उनके परिवार की ओर से कहा गया कि वे भाजपा छोड़ कर कहीं नहीं जा रहे हैं। जैसे ही उन्होंने यह बयान दिया वैसे ही उनको नोटिस देने वाले अधिकारी का तबादला पंजाब से सीधे चेन्नई कर दिया गया। इसके बाद शांति छा गई। लेकिन सवाल है कि क्या ईडी के डर से कैप्टेन अमरिंदर सिंह और उनका परिवार भाजपा में बने रहेंगे या अगले साल के चुनाव से पहले कोई कदम उठाएंगे?
