अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के लिए एक दूसरी विशेष जांच टीम का गठन किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 20 जुलाई को हुई सुनवाई में कहा कि किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई जाए। सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की याचिका दी गई थी। अदालत चाहती है कि एक नई एसआईटी इसकी जांच करे। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के तुरंत बाद लखनऊ में इसकी कवायद शुरू हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरी एसआईटी बनाने का आदेश दे दिया। अब सवाल है कि एक एसआईटी ने एक महीने तक जांच की है, जिसकी अंतरिम रिपोर्ट आ चुकी है और अंतिम रिपोर्ट भी तैयार है तो अब दूसरी एसआईटी क्या जांच करेगी?
यह बड़ी हैरानी की बात है कि अदालत ने जो बात इतनी आसानी से समझ ली वह बात सरकार को क्यों नहीं समझ में आई थी? अदालत ने कहा कि यह एक अपराध की जांच का मामला है। इसी आधार पर उसने वरिष्ठ आईपीएस के नेतृत्व में एसआईटी बनाने को कहा। अगर यह बात सरकार की समझ में आ जाती तो उसने पहले ही एसआईटी का अध्यक्ष किसी आईपीएस को बनाया होता। लेकिन सरकार ने आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत को एसआईटी का प्रमुख बनाया। ध्यान रहे आईएएस अधिकारी को अपराध के जांच का प्रशिक्षण नहीं मिला होता है। इसका प्रशिक्षण पुलिस अधिकारियों को होता है। सरकार ने पता नहीं किस कारण से अपराध की जांच का जिम्मा आईएएस अधिकारी को दिया। इस मामले में मुश्किल यह है कि मंदिर प्रशासन, अयोध्या पुलिस, एसआईटी सब जांच कर चुके हैं। अब नई एसआईटी को जांच में क्या मिलेगा यह समझना मुश्किल है। यह उम्मीद करना बेमानी है कि अब नई एसआईटी कोई नई चीज खोज लेगी। कितना भी काबिल आईपीएस होगा अपराध के इतना समय बीत जाने और कई बार जांच, पूछताछ हो जाने के बाद कुछ नया नहीं कर सकता है।
