पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से सीवी आनंद बोस को हटा दिया गया। वे आईएएस अधिकारी रहे हैं। बंगाली हैं लेकिन तमिलनाडु में रहते थे। उनको किसी खास मकसद से जगदीप धनखड़ की जगह बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था। लेकिन उन्होंने लगता है कि वह मकसद पूरा नहीं किया। पिछले दिनों राज्य सरकार का बजट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेश किया। बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ, जिसमें बोस ने सरकार का लिखा पूरा अभिभाषण पढ़ दिया। उन्होंने आरएन रवि, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, थावरचंद गहलोत या शिव प्रताप शुक्ल की तरह तमाशा नहीं किया। उसी समय लग गया था कि इन दिन गिने चुने हैं।
सो, अब सवाल है कि इसके बाद किसकी बारी है? विपक्षी शासन वाले सभी राज्यों में राज्यपालों ने तमाशा किया और अभिभाषण नहीं पढ़ा। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में ऐसा दिखा। बंगाल के अलावा एक अपवाद झारखंड का है। झारखंड में राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी राज्य सरकार के प्रति सद्भाव दिखाया और उसका लिखा हुआ पूरा अभिभाषण पढ़ दिया। ऐसा लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की दिली तमन्ना हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी जेएमएम को एनडीए में लाने की है। इसी मकसद से राज्यपाल ने सद्भाव दिखाया। लेकिन लग नहीं रहा है कि हेमंत इस बारे में गंभीर हैं। सो, या तो राज्यपाल को टकराव बढ़ाना होगा या विदा होना होगा।
