उत्तर प्रदेश में अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव होना है। उससे पहले राज्य की राजनीति में कई तरह की कहानियां चल रही हैं। उनमें एक कहानी यह है कि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। कहा जा रहा है कि अब तक के चुनावी इतिहास को देखते हुए उन्होंने नहीं लड़ने का फैसला किया है। गौरतलब है कि केशव प्रसाद मौर्य का विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। वे एक उपचुनाव सहित पांच चुनाव लड़ें हैं लेकिन सिर्फ एक ही बार चुनाव जीत पाए हैं। पिछली बार भी वे सिराथू सीट से चुनाव लड़े थे और अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल ने उनको चुनाव हरा दिया था। पल्लवी पटेल की बहन अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं। हालांकि दोनों की पार्टी अलग अलग है।
बहरहाल, जानकार सूत्रों का कहना है कि केशव प्रसाद मौर्य इस बार सिराथू सीट से नहीं लड़ना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने कुछ करीबी विधायकों से सीट छोड़ने का अनुरोध किया है। लेकिन कोई अपनी सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश संगठन में उनके करीबी लोग केशव प्रसाद मौर्य में हवा भर रहे हैं कि वे सिराथू से ही लड़ें और पल्लवी पटेल को हरा कर अपनी हार का बदला लें। हालांकि केशव मौर्य इस झांसे में आते नहीं दिख रहे हैं। अगर उनको कोई सुरक्षित सीट नहीं मिलती है तो वे इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। वे विधान परिषद में हैं और वहीं बने रहेंगे। ज्यादा जोर देने पर वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मिसाल भी दे सकते हैं। वे भी विधान परिषद में हैं।
