महाराष्ट्र में 29 शहरी निकायों का चुनाव 15 जनवरी को होने वाला है। इसमें बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी का चुनाव भी है। इसके अलावा पुणे, ठाणे, नासिक, नागपुर जैसे तमाम शहरों में निगम का चुनाव है, जिसके बाद इन शहरों के मेयर चुने जाएंगे। 15 जनवरी को मतदान से ठीक पहले 14 जनवरी को राज्य सरकार महाराष्ट्र की महिलाओं के खाते में मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना का पैसा ट्रांसफर करेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने डेढ़ हजार रुपए देती है। लेकिन दो महीने का पैसा रोका गया है। दिसंबर और जनवरी का तीन हजार रुपया एक साथ 14 जनवरी को महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा और अगले दिन वे वोट डालने जाएंगी। पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना में गड़बड़ियों को पकड़ने और अयोग्य लोगों की पहचान कर उनका नाम इस योजना से हटाने का काम भी रोक दिया है।
मतदान से ठीक पहले सरकारी खजाने से अलग अलग समूहों के खातों में पैसा ट्रांसफर करने की ऐसी परंपरा बन गई है कि जो भी पार्टी सरकार में है उसने पूरी निष्ठा के साथ इसे अपना लिया है। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने इसी तरह 2024 के नवंबर में मतदान से ठीक पहले महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर किए तो बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में पैसे भेजे। अब महाराष्ट्र में शहरी निकायों के चुनावों में भाजपा की सरकार भी यही काम कर रही है। तभी कांग्रेस या शिव सेना के विरोध का कोई अर्थ नहीं है। दोनों ने राज्य चुनाव अधिकारी को चिट्ठी लिखी है और शिकायत की है लेकिन चूंकि योजना पहले से चल रही है और हर महीने महिलाओं के खाते में पैसे भेजे जाते हैं तो चुनाव आयोग इसे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं मानेगा। लेकिन यह स्पष्ट रूप से वोट को प्रभावित करने का मामला है। इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति बिगड़ रही है वह अलग मामला है।
