राष्ट्रहित या सच्ची भारतीयता ?

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‘नया इंडिया’ में सन् 2020 में छपे मेरे लेखों का यह संग्रह आपके हाथों में है। दैनिक अखबार के तौर पर ‘नया इंडिया’ की पकड़ गजब की है।

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‘नया इंडिया’ में सन् 2020 में छपे मेरे लेखों का यह संग्रह आपके हाथों में है। दैनिक अखबार के तौर पर ‘नया इंडिया’ की पकड़ गजब की है। ‘नया इंडिया’ को ही इसका श्रेय है कि साल के 365 दिनों में हर दिन मैंने इसके लिए लिखा है, उस दिन भी जिस दिन मेरी पत्नी का निधन हुआ था।

यों तो मैं पिछले साठ-पैंसठ सालों से बराबर लिखता रहा हूं लेकिन ‘नया इंडिया’ के लिए इतने नियमित लेखन का मूल कारण यह है कि इस अखबार को सामान्य पाठक तो पढ़ते ही हैं, उनके अलावा हिंदी का यह ऐसा अखबार है, जिसे नेतागण और देश के नीति-निर्माता नौकरशाह भी पढ़े बिना नहीं रहते।

इसका मूल कारण यह है कि यह समाचार पत्र कम और विचार पत्र ज्यादा है। मैं समझता हूं कि दुनिया में सबसे ताकतवर कोई चीज़ है तो वह विचार है। मेरी राय में किसी परमाणु बम से भी अधिक कोई शक्तिशाली अस्त्र है तो उसका नाम विचार ही है।

विचार ही क्रांतियों, साम्राज्यों, युद्धों और शांतियों के मूल में होता है। इन लेखों में भारत की राजनैतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और वैदेशिक समस्याओं पर खुलकर लिखा गया है। जितनी स्वाधीनता मैंने इन लेखों को लिखते वक्त महसूस की है, अपने जीवन में मैंने कभी नहीं की। देश के सबसे बड़े अखबार और सबसे बड़ी समाचार समिति के संपादक रहते हुए भी नहीं! इसका श्रेय ‘नया इंडिया’ के संपादक श्री हरिशंकर व्यास को दिए बिना कैसे रहा जा सकता है।

इस संग्रह के लेखों में आप देश की ज्वलंत समस्याओं पर त्वरित टिप्पणियां तो पाएंगे ही, उनके साथ-साथ ऐसे मौलिक विचार भी देखेंगे, जो भारत को महाशक्ति और महासंपन्न बनाने में मददगार होंगे। – डा वेदप्रताप वैदिक

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