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असहिष्णुता है बड़ी चुनौती: राहुल

वाशिंगटन। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वंशवाद के बाद एक और विवादित मुद्दा उठाया है। अमेरिका की यात्रा पर आए राहुल ने एक के बाद एक कई बैठकों में असहिष्णुता और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े एक थिंक टैंक के साथ बैठक की और इसके अलावा अमेरिका प्रशासन के अधिकारियों और वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकारों से चर्चा की। अपनी बैठकों में राहुल ने कहा कि असहिष्णुता भारत की सबसे बड़ी दो चुनौतियों में से एक है। उन्होंने दूसरी चुनौती के तौर पर बेरोजगारी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता और बेरोजगारी दो मुख्य मुद्दे हैं, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं।

अमेरिका के दो सप्ताह के दौरे पर आए राहुल ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति झुकाव रखने वाले थिंक टैंक सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस, सीएपी की ओर से आयोजित यहां भारतीय दक्षिण एशियाई विशेषज्ञों के गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस बैठक में सीएपी प्रमुख नीरा टंडन, भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा और हिलेरी क्लिंटन के शीर्ष कैंपेन सलाहकार जॉन पोडेस्टा ने हिस्सा लिया। राहुल ने कई और बैठकों में भी हिस्सा लिया।

व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की दक्षिण एशिया संभाग की प्रमुख लीजा कुर्टिस ने सुबह के नाश्ते के दौरान राहुल के साथ चर्चा की। इस दौरान ट्रंप प्रशासन की अधिकारी ने अमेरिका-भारत संबंधों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में घोषित अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति पर राहुल के विचार पूछे। इसके अलावा अमेरिका भारत व्यापार परिषद की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूएस चैंबर ऑफ कॉर्मस के अध्यक्ष व सीईओ थॉमस जे डोनोह्यू ने राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेताओं से भेंट की।

इस बैठक के दौरान राहुल ने भारत में रोजगार के अवसर बढ़ाने में सरकार की विफलता पर चिंता जताई। उनका मानना यह स्थिति देश को खतरे की ओर लेकर जा रही है। राहुल ने वाशिंगटन पोस्ट की संपादकीय टीम के साथ ऑफ द रेकार्ड बातचीत की, जहां उन्होंने दुनिया भर, और खास तौर से भारत में बढ़ रही असहिष्णुता पर चिंता जताई। शाम को राहुल ने बंद कमरे में हुई एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसका आयोजन रिपब्लिकन रणनीतिकार पुनीत अहलूवालिया और अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने साझा तौर से किया था।

अहलूवालिया ने कहा- मैं कहूंगा कि, वे ऐसे व्यक्ति नहीं लगे, जिन्हें मुद्दों की जानकारी ना हो। वे मुद्दों को समझते हैं। वे जमीनी स्तर की हकीकत समझने वाले नेता के तौर पर दिखे। सभी लोग जब बाहर निकले तो उनके मन में चर्चा को लेकर बहुत सकारात्मक भाव था। माना जा रहा है कि राहुल ने वर्जीनिया के गवर्नर टेरी मैकएलिफ से भी भेंट की है। आम तौर पर बैठकों में भाग लेने वाले ज्यादातर लोग राहुल गांधी के ज्ञान, विचारों में स्पष्टता और सच्चाई से प्रभावित थे।

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