भाजपा-टीडीपी में वोट की खींचतान

भाजपा के पुराने सहयोगियों में से एक तेलुगू देशम पार्टी बहुत तीखी बयानबाजियों के बाद भाजपा से अलग अलग हो गई। बाद में भाजपा ने उसके चार राज्यसभा सांसदों को तोड़ लिया। अब दोनों के बीच आंध्र प्रदेश के हिंदू वोटों के लिए खींचतान मची है। असल में आंध्र प्रदेश से अलग हुए तेलंगाना में टीडीपी का जो वोट बैंक था वह बहुत सहज अंदाज में भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया और अब आक्रामक ध्रुवीकरण की राजनीति करके कांग्रेस के वोट में भी भाजपा ने सेंध लगा दी है। तभी भाजपा को लग रहा है कि वह आंध्र प्रदेश में भी टीडीपी का वोट हासिल कर सकती है।

ध्यान रहे जब भाजपा और टीडीपी एक साथ थे तब 2014 के चुनाव में भाजपा को लोकसभा की दो सीटें मिली थीं और तीन फीसदी वोट मिले थे। पर 2019 में वह अकेले लड़ी तो उसको 0.85 फीसदी यानी एक फीसदी से भी कम वोट मिले। पर उसके बाद भाजपा हिंदुत्व की अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रही है। पिछले दिनों विशाखापत्तनम के पास रामतीर्थम में चार सौ साल पुरानी भगवान राम की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो भाजपा ने वहां से एक रथयात्रा निकालने का ऐलान किया है। रामतीर्थम से यात्रा शुरू होकर तिरुपति के पास स्थित कपिलतीर्थक तक जाएगी। गौरतलब है कि तिरूपति लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है।

ऊपर से भाजपा ने एनटी रामाराव की बेटी डी पुरंदेश्वरी को पार्टी में महासचिव बनाया गया है और पार्टी मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के ईसाई होने के बहाने हिंदू वोट गोलबंद करने में जुटी है। दूसरी टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू भी यहीं राजनीति कर रहे हैं। वे भाजपा से भी आगे बढ़ कर मंदिरों का मुद्दा उठा रहे हैं और हिंदू वोट आकर्षित करने की राजनीति कर रहे हैं।

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