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Thursday, May 13, 2021
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भाजपा के बाद सबसे ज्यादा पीके की सरकार

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कांग्रेस पार्टी ने एक और राज्य गंवा दिया है। अब सिर्फ तीन राज्यों- राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ में उसकी सरकार है। इसके अलावा तीन राज्यों- महाराष्ट्र, झारखंड और अब तमिलनाडु में उसके गठबंधन की सरकार है। पुड्डुचेरी में जीतने के बाद देश के 18 राज्यों और 49 फीसदी आबादी वाले हिस्से में भाजपा का राज हो गया है। अगर कांग्रेस के गठबंधन वाले राज्यों की सरकारों को छोड़ दें तो देश में भाजपा के बाद सबसे ज्यादा राज्यों में प्रशांत किशोर यानी पीके की सरकार है।

दो मई को पांच राज्यों में आए चुनाव नतीजों के बाद दो राज्यों में भाजपा की तो दो राज्यों में उनकी सरकार बनी। तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रबंधन का काम किया था। उनके हिसाब से दोनों पार्टियों ने रणनीति बनाई थी, उम्मीदवारों का चयन किया था और प्रचार किया था। चुनावी मुद्दे बनाने से लेकर धारणा प्रभावित करने वाले मुद्दों पर पार्टी की लाइन पीके ने तय कराई थी। इन दो राज्यों में जीत के बाद अब देश के छह राज्यों में प्रशांत किशोर की सरकार हो गई है।

इससे पहले उन्होंने दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की मदद की थी। वे चुनाव के अधबीच केजरीवाल के साथ जुड़े थे और उन्होंने ही ‘लगे रहो केजरीवाल’ का नारा दिया था। इस नारे ने दिल्ली में केजरीवाल के प्रति धारणा बदलने में बड़ी मदद की थी। हालांकि बाकी राज्यों की तरह दिल्ली में वे पूरी तरह से आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव प्रबंधन नहीं संभाल रहे थे, लेकिन उन्होंने अरविंद केजरीवाल को लगातार तीसरी बार शानदार प्रदर्शन करने में बड़ी मदद की थी।

उद्धव ठाकरे आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं तो उसमें बड़ा रोल प्रशांत किशोर का रहा है। उन्होंने उनके लिए चुनावी रणनीति बनाने के साथ साथ इस बात के लिए तैयार किया कि वे चुनाव के बाद भाजपा को छोड़ कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाएं। उससे पहले उन्होंन लोकसभा चुनाव के साथ हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस के लिए चुनाव प्रबंधन का काम किया था और जगन मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने में बड़ी मदद की थी। और उससे भी पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में पंजाब में उन्होंने कैप्टेन अमरिंदर सिंह के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम किया था। इस तरह छह राज्यों में इस समय उनके बनवाई या उनकी मदद से बनी सरकार है। प्रशांत किशोर पिछले 10 साल से भारत में चुनाव प्रबंधन का काम कर रहे हैं और नौ चुनावों में से सिर्फ एक उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को छोड़ कर हर बार सफल रहे हैं। जदयू-राजद को साथ लाने और शिवसेना-कांग्रेस को साथ लाने जैसा असंभव माना जाने वाला काम भी प्रशांत किशोर ने किया है।

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