Agriculture and insurance bill कृषि व बीमा बिल और सांसदों का निलंबन
राजरंग| नया इंडिया| Agriculture and insurance bill कृषि व बीमा बिल और सांसदों का निलंबन

कृषि व बीमा बिल और सांसदों का निलंबन

Agriculture and insurance bill

भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार एक साथ राज्यसभा के 12 सांसदों को निलंबित किया गया। संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों से बदसलूकी के आरोप में संसदीय कार्यमंत्री की शिकायत पर राज्यसभा के सभापति ने 12 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने का फैसला किया। इससे पहले कभी इतने राज्यसभा सांसद निलंबित नहीं हुए थे। इससे पहले सबसे ज्यादा राज्यसभा सांसदों के निलंबन का रिकार्ड भी इसी सरकार ने बनाया था और वह भी एक साल पहले ही, जब राज्यसभा के आठ सांसदों को निलंबित किया गया था। लोकसभा से एक साथ सबसे ज्यादा 25 सांसदों को निलंबित करने का रिकार्ड भी इसी सरकार के समय बना था।

बहरहाल, अब सवाल है कि आठ सांसदों और फिर 12 सांसदों के निलंबन के बीच क्या कोई समानता है? हां, इन दोनों घटनाओं के बीच बहुत स्पष्ट समानता है। पहला निलंबन कृषि विधेयकों को जोर-जबरदस्ती पास कराने के समय हुआ था और दूसरा निलंबन साधारण बीमा बिल को जोर-जबरदस्ती पास कराने के समय हुआ। विपक्ष इन दोनों विधेयकों का विरोध कर रहा था और संसदीय समिति के पास भेजने की मांग कर रहा था। लेकिन सरकार को कुछ अज्ञात कारणों से इन विधेयकों को पास कराने की जल्दी थी। तभी वोटिंग की मांग को दरकिनार कर तीनों कृषि कानून पास कराए गए और विपक्षी सांसदों के मुताबिक सदन में उनकी पिटाई करा कर बीमा बिल पास कराया गया।

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जिन कृषि विधेयकों को पास कराने के लिए सरकार ने सदन में जोर-जबरदस्ती की और जिसके लिए आठ सांसदों को निलंबित किया गया, उसके बाद सांसद संसद परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के आगे धरने पर बैठे, वे तीनों कानून सरकार ने वापस ले लिए हैं। उन तीनों कानूनों को लेकर आरोप लगे थे कि उनका खेती-किसानी से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि पूरे कृषि सेक्टर को कारपोरेट के हाथों में सौंप देने के लिए उन्हें बनाया गया था, लेकिन किसानों ने इसे भांप लिया और ऐसा आंदोलन किया कि सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा।

सांसदों के निलंबन की दूसरी घटना साधारण बीमा बिल के समय हुई थी। पहले कहा गया था कि सरकार अपनी चार साधारण बीमा कंपनियों में से एक का निजीकरण करेगी। लेकिन जब यह बिल आया तो इसमें चारों सरकारी बीमा कंपनियों में सरकारी भागीदारी घटाने का प्रावधान किया गया। तभी इस बिल का ज्यादा विरोध शुरू हुआ। अच्छा खासा कारोबार कर रही बीमा कंपनियों को बेचने की बेचैनी में यह बिल पास हुआ। सो, कृषि और बीमा कानून दोनों में एक समानता यह भी है कि इनका मकसद कारपोरेट को फायदा पहुंचाना था।

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