आंदोलन का बढ़ रहा दायरा

सरकार अब भी किसान आंदोलन को लेकर धोखे में है। सरकार को लग रहा है कि आंदोलन सिर्फ पंजाब और हरियाणा के किसान कर रहे हैं, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कुछ किसान शामिल हैं और इसका दायरा दिल्ली की सीमा के बाद 25 किलोमीटर तक है। लेकिन यह हकीकत नहीं है। किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। दिल्ली की सीमा के बाहर इसका भौगोलिक विस्तार लगभग पूरे देश में हो गया है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर से लेकर आगे 20-25 किलोमीटर तक किसान बैठे हैं। भिवाड़ी से अलवर की ओर बढ़ने पर तिजारा से आगे तक किसान हैं। एक सिरे पर योगेंद्र यादव और दूसरे पर रामपाल जाट व्यवस्था संभाले हुए हैं। ये किसान सिर्फ हरियाणा और राजस्थान के नहीं हैं, बल्कि इनमें गुजरात और मध्य प्रदेश से आए किसान भी शामिल हैँ।

सो, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के किसान भी आंदोलन में शामिल हैं। उधर बिहार में किसानों के समर्थन में लगातार प्रदर्शन हो रहा है। राजधानी पटना सहित राज्य के 20 जिलों में किसान आंदोलन कर रहे हैं। पिछले दिनों दक्षिण भारत में पोंगल मनाया गया, जिसके मौके पर इन राज्यों में बुल फाइट की तर्ज पर जल्लीकट्टू का आयोजन होता है। इस जल्लीकट्टू के आयोजन में कई जगह बुल फाइट के लिए उतरे लोगों ने किसान आंदोलन के समर्थन में और कृषि कानूनों के विरोध में नारेबाजी की। इस तरह से उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक ज्यादातर राज्यों में किसानों के समर्थन में आंदोलन हो रहे हैं। जितना समय बीत रहा है उतना ही यह आंदोलन जन मानस में पैठ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares