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सरकार ने विपक्ष को एक कर दिया

केंद्र सरकार की राजनीति अब तक विपक्ष को बांटने की रही है लेकिन विवादित कृषि विधेयकों पर केंद्र सरकार की राजनीति ने समूचे विपक्ष को एक कर दिया है। विपक्ष की यह एकता संसद के अंदर तो दिख ही रही है, बाहर भी विपक्ष एक होकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। हालांकि संसद के अंदर सरकार को ज्यादा परेशानी नहीं होनी है क्योंकि सरकार के ज्यादातर कामकाज निपटने ही वाले हैं और एक-दो दिन में संसद का मॉनसून सत्र खत्म भी होने वाली है। इसलिए सरकार को उसकी चिंता नहीं है पर संसद के बाहर विपक्ष के एक होने की चिंता सरकार को करनी होगी।

राज्यसभा से निलंबित किए गए आठ सांसद चार पार्टियों के हैं और इन चारों के बीच संबंध एक जैसे नहीं हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच आपस में छत्तीस का आंकड़ा है तो तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच भी सनातन झगड़ा है। इसके बावजूद सभी पार्टियों के सांसद एक साथ धरने पर बैठे। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की बगल में बैठे कांग्रेस के अहमद पटेल की वीडियो वायरल हुई। तृणमूल कांग्रेस सांसद डोला सेन के गाने पर सीपीएम के नेता ताली बजा रहे थे। यह एकता भले पश्चिम बंगाल के चुनाव में नहीं दिखे पर दिल्ली में इस एकजुटता की राजनीति का मैसेज पूरे देश में जाएगा।

इससे पहले संसद की कार्यवाही में दक्षिण भारत की पार्टियों का एकमुश्त समर्थन सरकार को मिलता था। पर इस बार तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति ने सरकार का विरोध किया और विपक्ष का साथ दिया। इसी तरह ओड़िशा की सत्तारूढ़ पार्टी बीजू जनता दल ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हर बार सरकार का साथ दिया है लेकिन इस बार बीजद ने भी सरकार का विरोध किया। दो बड़ी तटस्थ पार्टियों का विरोध सरकार के लिए आगे मुश्किल पैदा करेगा।

अब संसद चाहे एक दिन चल कर बंद हो जाए पर विपक्ष एकजुट रहेगा और यह भी तय हो गया है कि कृषि से जुड़े तीनों विधेयकों का विरोध ठंडा नहीं पड़ेगा। सारी पार्टियों ने साथ मिल कर इसके विरोध का फैसला किया है। किसान संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद को एक एक करके पार्टियों ने समर्थन देना शुरू कर दिया है। सबसे पहले लेफ्ट पार्टियों ने उसे समर्थन दिया। दिल्ली से सटे राज्यों में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी इस बंद को सफल बनाने में पूरी मेहनत करेंगे। कांग्रेस को राहुल गांधी के विदेश से लौटने का इंतजार है। उसके बाद कांग्रेस भी विरोध, प्रदर्शन और पूरे देश में आंदोलन का ऐलान करेगी। बिहार और अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव से पहले कृषि विधेयकों पर विपक्ष का आंदोलन सरकार को मुश्किल में डालेगा।

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