गुलेरिया की बातों का बड़ा मतलब

भारत के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था, एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया लगातार और बहुत साहस के साथ कोरोना वायरस के संकट के बारे में अपनी राय रखते आए हैं। उन्होंने एक बार फिर कहा है कि भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण अभी बहुत फैलेगा और इसकी पीक आने में बहुत समय लगेगा। गुलेरिया के मुताबिक भारत में वायरस के संक्रमण का पीक दो से तीन महीने बाद आएगा। यानी उनके हिसाब से अगस्त-सितंबर में भारत में सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले होंगे। सवाल है कि क्या सरकार उनकी इस बात को सुन रही है?
इस समय सरकारी एजेंसियों का दावा है कि मामले दोगुने होने की दर बढ़ गई है। पर यह सबको दिख रहा है कि हर दिन दस हजार के करीब मामले आ रहे हैं और अब ऐसे इलाकों में संक्रमण फैलने की खबरें आ रही हैं, जहां कुछ दिन पहले संक्रमण का एक दौर खत्म हो गया था। जैसे गोवा में पहले दौर में सात मामले आए थे और सारे ठीक हो गए थे पर अब वहां तीन सौ नए मामले आ गए हैं। गोवा जैसे छोटे से राज्य में तीन सौ मामले आना मामूली बात नहीं है। इसी तरह केरल में जहां पहले दौर के लगभग सारे मरीज ठीक हो गए थे और सिर्फ छह या सात लोगों की मौत हुई थी वहां अब करीब दो हजार मामले आ गए हैं।

तभी सरकार को वैज्ञानिक तरीके से कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रोजेक्शन तैयार कराना चाहिए और गुलेरिया की बात को ध्यान में रखते हुए यह अनुमान बनवाना चाहिए कि भारत में दो-तीन महीने के बाद जब पीक आएगा तब कितने केसेज होंगे। दस हजार मामले के औसत के हिसाब से ही पिछले पांच दिन में भारत में संक्रमितों की संख्या दो लाख से बढ़ कर ढाई लाख हो गई है। इसका मतलब है कि इस औसत से जून के अंत में पांच लाख केसेज होंगे। अगर केसेज दोगुने होने की दर 25 दिन भी रहती है तो अगस्त में पीक आने तक भारत में 20 लाख से ज्यादा केसेज हो सकते हैं। तभी भले सरकार दूसरे बौद्धिकों को कयामत का पैगंबर कहे पर एम्स के निदेशक की बात जरूरत सुननी चाहिए।

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