ऑल इंडिया मुस्लिम पार्टी बनेगी!

क्या अंदरखाने देश में किसी ऑल इंडिया मुस्लिम पार्टी के निर्माण की तैयारी चल रही है? हाल में हुए दो-तीन चुनावों में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे लगा है कि देश का मुस्लिम समाज अपने लिए नेता तलाश रहा है। पुराने नेताओं पर उन्हें भरोसा नहीं है। कांग्रेस से ऊपर से मुसलमानों का भरोसा 1992 में ही खत्म हो गया था, जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया था। उसके बाद जब भी उन्हें मौका मिला, उन्हें गैर कांग्रेसी राजनीति की। बिहार में उन्होंने लालू प्रसाद तो उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह को मसीहा बनाया। इसी कड़ी में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को उन्होंने अपना मसीहा बनाया था। पर अब केजरीवाल से भारी मोहभंग है। दिल्ली दंगों और उससे पहले जेएनयू के घटनाक्रम में दिल्ली सरकार का जैसा आचरण रहा है, उससे मुस्लिम उनसे बुरी तरह से नाराज हुए हैं। इधर लालू प्रसाद, मुलायम सिंह आदि नेता अब सक्रिय राजनीति से लगभग बाहर हो गए हैं।

सो, अब मुस्लिम अपने लिए नेता तलाश रहे हैं और अपनी एक पार्टी तलाश रहे हैं। यह आजादी की लड़ाई के समय जैसी स्थिति बन रही है। जैसे उस समय कांग्रेस से अलग मुस्लिम लीग का गठन हुआ और पूरे देश में लीग ने अपनी पहुंच बनाई। वैसी स्थिति की संभावना दिख रही है। फिलहाल तीन पार्टियां विशुद्ध रूप से मुस्लिम सरोकार की राजनीति कर रही हैं। असम में बदरूद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूडीएफ, हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया एमआईएम और केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग। ओवैसी की पार्टी अब हैदराबाद से निकल कर महाराष्ट्र और बिहार में भी पैर जमा चुकी है। सो, इन तीन पार्टियों के नेताओं पर सबकी नजर है। अपने अपने राज्य और असर वाले इलाकों में राजनीति करते हुए ये अखिल भारतीय राजनीतिक प्लेटफॉर्म बना सकते हैं। अगर ये तीनों ऐसा करते हैं तो भारतीय मुसलमान इन्हें हाथों हाथ लेगा। लेकिन इस किस्म के राजनीतिक विभाजन का असर सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा और पूरी समाज व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

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