पवार परिवार में सब कुछ ठीक नहीं

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने के बाद ऐसा लग रहा था कि शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बीच सब कुछ ठीक है। यह भी कहा जाने लगा था कि अजित पवार ने पार्टी के बगावत करके भाजपा के साथ मिल कर चार-पांच दिन की जो सरकार बनाई थी वह भी पवार परिवार का मिला-जुला उद्यम था। तभी घर वापसी करने पर अजित पवार को फिर से उप मुख्यमंत्री बनाया गया। उनका उप मुख्यमंत्री बनना तो ठीक है पर चाचा भतीजे का संबंध पूरी तरह से ठीक नहीं लग रहा है। ऐसा लग रहा है कि अजित पवार पिछले लोकसभा चुनाव में अपने बेटे पार्थ पवार की हार को हजम नहीं कर पाए हैं। उन्होंने शरद पवार की इच्छा कि विपरीत अपने बेटे को चुनाव में उतारा था। पार्थ की वजह से पवार खुद चुनाव नहीं लड़ पाए थे। उस चुनाव में पार्थ हारे तो माना गया कि पवार ने उनकी हार सुनिश्चित कराई।

शरद पवार का वरदहस्त अजित पवार के भाई और उनके बेटे रोहित पवार के ऊपर बताया जाता है। रोहित अभी एनसीपी के विधायक हैं। बहरहाल, पिछले दिनों पार्टी लाइन से अलग हट कर पार्थ पवार ने शिव सेना के नेता और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख से मुलाकात की और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग की। उनकी इस मांग पर  पार्टी में चौतरफा चुप्पी रही। किसी ने पार्थ को कुछ नहीं कहा। अब शरद पवार ने कहा है कि पार्थ अपरिपक्व हैं। सोचें, अजित पवार ने अपने जिस बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़ाया था, उसे शरद पवार ने अपरिपक्व बता कर उनकी बात को खारिज किया है। एनसीपी के नेता मान रहे हैं यह परिवार के भीतर कम्युनिकेशन की कमी का संकेत है।

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