शाह की तमिलनाडु यात्रा से क्या हासिल?

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा की जबरदस्त हाइप बनाई गई। ऐसा लगा, जैसे उनकी तमिलनाडु यात्रा से पूरे प्रदेश की राजनीति बदल गई है। अगले साल वहां चुनाव होने वाला है और उससे पहले अमित शाह की यात्रा का इतना हाइप बनाना असल में भाजपा की प्रचार रणनीति का हिस्सा है। वास्तव में इस यात्रा से कोई खास हासिल नहीं हुआ है। अमित शाह सिर्फ भाजपा के नेताओं से मिले और अपनी सहयोगी अन्ना डीएमके से बात की। अन्ना डीएमके नेताओं ने साथ मिल कर चुनाव लड़ने की सहमति जताई। यह भी कोई नई या बड़ी बात नहीं थी क्योंकि लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां साथ ही थीं। इसके बावजूद राज्य की 39 में से सिर्फ एक सीट जीत पाई। सो, दोनों के साथ मिल कर लड़ने का ऐलान कोई बड़ी बात नहीं थी।

असली बात यह थी कि तमिल फिल्मों के सुपर सितारे रजनीकांत से अमित शाह की मुलाकात नहीं हुई है और न डीएमके नेता एमके अलागिरी से उनकी मुलाकात हुई। उनकी तमिलनाडु यात्रा शुरू होने से पहले कहा जा रहा था कि रजनीकांत से उनकी मुलाकात होगी। लेकिन रजनीकांत मिले नहीं। चार्टर्ड एकाउंटेंट और भाजपा के हमदर्द एस गुरुमूर्ति के जरिए उनका संदेश अमित शाह तक पहुंचा। यह संदेश कहीं भी पहुंच सकता था, उसके लिए उनका चेन्नई में होना जरूरी नहीं था। इसी तरह डीएमके के पूर्व सांसद केपी रामालिंगम के जरिए एमके अलागिरी का संदेश अमित शाह को मिली। रामलिंगम ने अलागिरी से भाजपा में शामिल होने की अपील की है। ध्यान रहे अलागिरी मदुरै के इलाके में मजबूत नेता हैं और अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं तो उसे फायदा होगा। लेकिन कम से कम अमित शाह की इस यात्रा में उनको न रजनीकांत का साथ मिला और न अलागिरी का। लेकिन भाजपा ने हाइप बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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