रूस के रास्ते पर भारत!

भारत क्या रूस के रास्ते पर चल रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की राजनीति से कुछ नुस्खे उठा कर अपने यहां आजमा रहे हैं? यह गंभीर सवाल है, जो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत में कामकाज बंद करने के बाद सोशल मीडिया में उठाया जा रहा है। सोशल मीडिया में इस मामले में भारत और रूस की तुलना की गई है। रूस में चार साल पहले 2016 में एमनेस्टी इंटरनेशनल का दफ्तर बंद कराया गया था। घरेलू कानूनों, विदेशी संगठनों पर रोक लगाने के लिए लाए गए अवांछित संगठन कानून और मानवाधिकार के उल्लंघनों पर एमनेस्टी इंटरनेशनल के अभियान से नाराज होकर पुलिस ने संगठन के खिलाफ कार्रवाई की थी और किराया नहीं चुकाने जैसे मामूली आरोप में संगठन का दफ्तर बंद करा दिया गया था।

भारत में भी एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। उस पर विदेशी चंदे के कानून एफसीआरए के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। संगठन के सारे बैंक खाते सील कर दिए गए हैं। इसी वजह से संगठन ने भारत में अपना कामकाज बंद करने का ऐलान किया। इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई इतनी सख्त है कि कर्मचारियों का वेतन देने के लिए भी कोई एक खाता खुला नहीं रखा गया। संगठन का कहना है कि जम्मू कश्मीर की स्थिति, दिल्ली दंगे और मानवाधिकार की स्थिति पर आवाज उठाने की वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई हो रही है।

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