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आजाद, शर्मा की वापसी मुश्किल!

गुलाम नबी आजाद इस बार राज्यसभा से रिटायर होंगे तो फिर उच्च सदन में उनकी वापसी मुश्किल होगी। वैसे राजनीति में किसी के बारे में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। कई बार ऐसा हो चुका है कि जिस नेता के राजनीतिक रूप से खत्म हो जाने की श्रद्धांजलि लिख दी गई, उसने धमाकेदार वापसी की। सो, आजाद के बारे में भी भविष्यवाणी करने की जरूरत नहीं है पर मौजूदा हालात देख कर ऐसा लग रहा है कि उनकी वापसी मुश्किल होगी। सबसे पहले तो यही तय नहीं है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव कब होंगे और चुनाव होंगे तो उसमें कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी। उनके लिए एकमात्र संभावना यही है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और पीडीपी एक साथ लड़ें और उनको इतनी सीटें आएं कि उन्हें राज्यसभा की एक सीट मिल सके।

यह तय है कि कांग्रेस आलाकमान उनको दूसरे राज्य से राज्यसभा में नहीं भेजेगा। ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ करके उनके लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह प्रचार शुरू हो गया है कि वे परदे के पीछे भाजपा के लिए ही काम करते थे। ध्यान रहे जब आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस के 23 असंतुष्ट नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी थी और संगठन चुनाव की मांग की थी तब सूत्रों के हवाले से यह खबर आई थी कि राहुल गांधी ने बैठक में कहा था कि चिट्ठी लिखने वाले भाजपा के लोग हैं। हालांकि बाद में इसका खंडन किया गया पर अब प्रधानमंत्री की तारीफ के बाद इस तरह का प्रचार तेज हो गया है।

राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा भी उन 23 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी। इतना ही नहीं बाद में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में भी वे बहुत मुखर रहे थे। उनका कार्यकाल अगले साल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है। राज्य की तीन में से सिर्फ एक सीट आनंद शर्मा वाली खाली हो रही है और जाहिर है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा को मिलेगी। सो, आनंद शर्मा पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान की कृपा पर हैं कि वह किसी दूसरे राज्य से उनको राज्यसभा में भेजे। दूसरे राज्यों में राजस्थान या छत्तीसगढ़ से संभावना बन सकती है पर राजस्थान से पहले ही मनमोहन सिंह और केसी वेणुगोपाल के रूप में दो बाहरी लोग सांसद हैं और छत्तीसगढ़ से भी केटी तुलसी को भेजा गया है। इसलिए दोनों राज्य शायद ही किसी बाहरी को राज्यसभा में भेजेंगे। अगर किसी बाहरी को भेजने का फैसला होता है तो वह कांग्रेस आलाकमान का फैसला होगा।

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