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तीन राजधानी का विचार अच्छा है

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सत्ता के विकेंद्रीकरण का एक नायाब प्रस्ताव पेश किया है। वे चाहते हैं कि उनके राज्य की राजधानी तीन हिस्सों में बंटे। कार्यपालिका के लिए अलग राजधानी बने, विधायिका का राजधानी अलग हो और न्यायपालिका के लिए अलग राजधानी हो। ध्यान रहे देश में बढ़ते शहरीकरण और अलग अलग हिस्सों से लोगों का राज्यों और देश की राजधानी की ओर पलायन पिछले दो दशक में बहुत बढ़ा है। तभी शहर प्लानर चाहते हैं कि सरकार अपना विकेंद्रीकरण करे। कुछ सरकारी कार्यालय दूसरे शहरों में खोले जाएं ताकि राजधानियों पर दबाव कम हो। अगर जगन अपने इस प्रोजेक्ट में कामयाब होते हैं तो इससे एक नई मिसाल कायम होगी।

उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के विभाजन के बाद हैदराबाद की जगह अमरावती में राजधानी बनाने का फैसला किया था। इसके लिए हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी और कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया था। बाद में जगन मोहन रेड्डी ने कई परियोजनाओं पर काम रोक दिए। अब वे चाहते हैं कि अमरावती प्रदेश की विधायी राजधानी हो। यानी वहां विधानसभा हो और वहीं पर विधायकों के आवास हों। पर बाकी सरकार वहां से दूर रहे।

उनकी योजना के मुताबिक कार्यपालिका की राजधानी विशाखापत्तनम में बने। वहां मुख्यमंत्री और बाकी मंत्रियों के आवास की व्यवस्था हो और सरकारी कर्मचारियों के वहां रहने की सुविधा हो। न्यायपालिका की राजधानी यानी हाई कोर्ट के लिए जगन ने कुरनूल का नाम सुझाया है। अगर कुरनूल में हाई कोर्ट बनता है तो जजों के रहने की व्यवस्था वहां होगी। इस तरह किसी एक शहर पर दबाव नहीं बढ़ेगा। अभी सब कुछ राजधानी में होने की वजह से राजधानियों पर बहुत ज्यादा दबाव होता है और सरकार के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने में भी मुश्किल आती है। जैसे दिल्ली में ही सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या इसलिए नहीं बढ़ाई जा पा रही है कि उनके लिए दिल्ली में बंगले नहीं हैं।

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