सीएए विरोधी अब भाजपा में

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यह कमाल की राजनीति हो रही है। कुछ समय पहले देश भर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर आंदोलन चल रहे थे। विरोध-प्रदर्शन हो रहा था और सीएए व एनआरसी के विरोध का आंदोलन आधुनिक समय का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया था। इसके दो छोर थे। एक छोर पर दिल्ली के शाहीन बाग में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं धरने पर बैठी थीं तो दूसरे छोर पर असम में बेहद आक्रामक प्रदर्शन हो रहे थे।

हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे और कई दिन तक हिंसा चली थी। दिल्ली का आंदोलन शांतिपूर्ण था तो असम का हिंसक था। पर अब ऐसा लग रहा है कि दोनों छोरों पर हवा बदल गई है। कोरोना वायरस ने सीएए और एनआरसी दोनों का विरोध खत्म कर दिया और अब विरोधी लोग भाजपा में शामिल होने लगे हैं।

ध्यान रहे सीएए और एनआरसी का सबसे तीखा विरोध असम में हुआ। वहां के सामाजिक संगठनों ने राजनीतिक दलों से ज्यादा विरोध किया। कलाकार, साहित्यकार आदि बड़ी संख्या में इस आंदोलन से जुड़े थे। पर इस विरोध से जुड़े 28 कलाकारों ने मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया। राज्य के नामी लोक कलाकारों का इस तरह से भाजपा में शामिल होना कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के लिए बड़ा झटका है।

भाजपा नेता उत्साह में हैं। उनको लग रहा है कि इससे राज्य की राजनीति पर बड़ा असर होगा। इससे पहले दिल्ली के शाहीन बाग में आंदोलन के मुख्य कर्ताधर्ता शहजाद अली भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ साथ कई और लोगों के भाजपा में शामिल होने की खबर है, जो शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े थे। इसके बाद आम आदमी पार्टी के कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि शाहीन बाग का धरना भाजपा ने ही प्रायोजित कराया था।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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