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सहयोगी दलों के नेताओं की भी उम्मीदें

कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के साथ ही भाजपा की सहयोगी पार्टियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली आए और पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले उसी दिन उत्तर प्रदेश से भाजपा की सहयोगी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल भी अमित शाह से मिलीं। वे पिछले दो साल से सरकार में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठी हैं। अगले साल के शुरू में उत्तर प्रदेश के चुनाव हैं और भाजपा गैर यादव पिछड़ी जातियों को साधने में लगी है इसलिए संभव है कि अब अनुप्रिया पटेल को केंद्र सरकार में जगह मिल जाए। उनके पति को प्रदेश में विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया था चुनाव से पहले वे भी मंत्री पद मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

अनुप्रिया पटेल के एक दिन बाद भाजपा के दूसरे सहयोगी दुष्यंत चौटाला ने भी अमित शाह से  मुलाकात की। चौटाला के साथ मुश्किल यह है कि उनकी पार्टी का एक भी सांसद नहीं है और अभी कहीं से किसी को राज्यसभा मिलने की भी उम्मीद नहीं है। इसलिए उनकी उम्मीदें अलग हैं। बिहार की सहयोगी जनता दल यू के तीन नेता पिछले दो साल से उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकार की शपथ के समय 30 मई 2019 को मंत्री बनते बनते रह गए आरसीपी सिंह अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो गए हैं लेकिन उनकी नजर केंद्रीय मंत्री पद पर है। उनके अलावा राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संतोष कुशवाहा दो अन्य दावेदार हैं। लोकसभा में अन्ना डीएमके का सिर्फ एक सांसद है, लेकिन राज्यसभा में उसके सदस्यों के संख्या ठीक ठाक है। राज्य की सत्ता से पार्टी के बाहर होने के बाद उसके भी कुछ नेता केंद्र में जगह मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

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