आरोग्य सेतु की सुरक्षा और सरकारी जबरदस्ती

केंद्र और कई राज्यों की सरकारें जबरदस्ती लोगों के आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करा रही हैं। केंद्र सरकार के कई विभागों को लेकर खबर आई कि उनमें कर्मचारियों के लिए यह एप डाउनलोड करना अनिवार्य बनाया गया है। उत्तर प्रदेश की सरकार ने समूचे नोएडा में रहने वालों के लिए यह एप अनिवार्य कर दिया है। जो लोग घरों में बंद हैं उन्हें को कोई दिक्कत नहीं है, पर घर से निकलने वाले लोगों के मोबाइल फोन में अगर यह एप नहीं है तो पुलिस को मनमानी और धांधली का लाइसेंस मिला हुआ है। सोचें, जिसके पास मोबाइल फोन नहीं हो या स्मार्ट फोन न होकर साधारण फीचर फोन हो वह क्या करेगा? पुलिस की लाठी खाएगा!

बहरहाल, यह जबरदस्ती तब है, जब इसकी डाटा की सुरक्षा को लेकर दस तरह के सवाल उठ रहे हैं। इससे लोगों की निजता को जबरदस्त खतरा है। इसे निजी पेशेवरों की टीम ने तैयार किया है, इसके नियम स्पष्ट नहीं हैं, डाटा कहां सुरक्षित रखा जाएगा यह पता नहीं है और सबसे ऊपर इससे लोगों को कैसे फायदा होगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। तकनीकी जानकारों का कहना है इसमें टर्म्स एंड कंडीशन हैं, जिनसे यूजर को अनिवार्य रूप से सहमत होना होगा, उसमें लिखा हुआ है कि अगर डाटा लीक होता है तो उसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं होगी।

सोचें, सरकार जिम्मेदारी नहीं ले रही है पर चाह रही है कि हर व्यक्ति अपनी सारी निजी जानकारी इसमें डाल दे। एक इथिकल हैकर इलियट एल्डरसन ने ट्विट करके इसकी खामियां बताईं तो सरकार उनसे ही उलझ गई, जबकि हकीकत है कि एल्डरसन ने पहले भी आधार का डाटा लीक करके इसकी खामी बताई थी। यह भी सब जानते हैं कि इसके खतरे को भांप कर सेना ने दफ्तरों या कमान पोस्ट या संवेदनशील इलाकों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई है। यह भी खबर है कि भुवनेश्वर पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे किसी लिंक के जरिए यह एप डाउनलोड न करें क्योंकि पाकिस्तान इसके जरिए डाटा जुटा रहा है। इसके बावजूद सरकार की जबरदस्ती समझ में नहीं आने वाली है। उसने जोर जबरदस्ती से नौ करोड़ लोगों के फोन में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करा दिया है।

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