केजरीवाल की वाया पंजाब केंद्र की राजनीति - Naya India
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केजरीवाल की वाया पंजाब केंद्र की राजनीति

किसान आंदोलन के शुरू होने के बाद लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा फिर जग गई है। उनको अपने आंदोलन के दिन याद आ रहे हैं। असल में भ्रष्टाचार के खिलाफ इंडिया अगेंस्ट करप्शन का पूरा आंदोलन केजरीवाल ने खड़ा किया था। वे अन्ना हजारे को खोज कर दिल्ली लाए थे और केंद्र की उस समय की यूपीए सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था। यह अलग बात है कि इस आंदोलन का फायदा भाजपा को मिल गया और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए। केजरीवाल को उसका इतना फायदा मिला कि वे भी दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। हालांकि वे इतने से कभी संतुष्ट नहीं रहे। उनकी दो इच्छाएं हैं पहले किसी पूर्ण राज्य का  मुख्यमंत्री बनना और फिर देश का प्रधानमंत्री बनना। इसके लिए उन्होंने बड़े हाथ-पैर मारे हैं।

अब फिर से उन्होंने प्रयास शुरू किया। उनको लग रहा है कि किसान आंदोलन के दम पर वे पंजाब की सत्ता हासिल कर सकते हैं। पंजाब में उनकी पार्टी मुख्य विपक्षी है। राज्य में सरकार चला रही कांग्रेस की स्थिति अगले दो साल में बिगड़ेगी। मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह 78 साल के हो गए हैं और 2022 के चुनाव तक वे 80 साल के होंगे। दूसरी ओर अकाली दल और भाजपा अलग अलग होकर कमजोर हुए हैं। इसलिए केजरीवाल किसी तरह से किसान आंदोलन में घुसने और उसका फायदा उठाने की राजनीति कर रहे हैं। उनको लग रहा है कि अगर पंजाब की सत्ता मिल गई तो वे एक मॉडल राज्य बना कर दिखा देंगे।

किसान आंदोलन के जरिए पंजाब साधने के साथ साथ केजरीवाल ने दूसरे राज्यों में भी राजनीति शुरू कर दी है। उन्होंने अपने करीबी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के हवाले उत्तर प्रदेश किया है। वे मुख्यमंत्री के दावेदार के दौर पर 2022 का यूपी चुनाव लड़ेंगे। केजरीवाल ने यूपी के अभियान का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को उत्तराखंड भेजा था। वहां पहले स्थानीय निकाय का चुनाव और फिर विधानसभा का चुनाव लड़ेगी उनकी पार्टी।

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