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नतीजों से पहले खरीद-फरोख्त का हल्ला!

पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी कि 2016 से 2020 के बीच पाला बदल कर दूसरी पार्टियों में जाने और उसकी टिकट से चुनाव लड़ने वाले विधायकों में से 45 फीसदी विधायक भाजपा में गए हैं। 2016 से 2020 के बीच कुल 405 विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़ी, जिनमें से 182 लोग भाजपा में गए और उसकी टिकट से चुनाव लड़े। इन चार सालों में मध्य प्रदेश, मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में विधायकों की दलबदल से सरकार गिरी और भाजपा की सरकार बनी।

भाजपा ने अपनी इस उद्यमशीलता का अब विस्तार कर दिया है। पहले चुनाव जीतने वाले विधायकों को तोड़ कर भाजपा अपने साथ लाती थी और उनकी मदद से सरकार बनाती थी। लेकिन अब चुनाव जीतने से पहले ही उसने खरीद-फरोख्त शुरू कर दिया है। असम और पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टियों के सामने अभी से बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वे अपने संभावित विधायकों को कैसे बचाएं। असम में तो भाजपा ने चुनाव की अधबीच बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के एक उम्मीदवार को तोड़ कर अपने साथ कर लिया और बीपीएफ को न चुनाव आयोग से कोई राहत मिली न सुप्रीम कोर्ट से।

तभी बीपीएफ ने अब अपने बचे हुए 11 उम्मीदवारों को किसी दूसरे देश में भेज दिया है। सोचें, असम में नतीजे दो मई को आने वाले हैं और तब तक यानी अगले 20 दिन बीपीएफ के 11 उम्मीदवार दूसरे देश में रहेंगे। कहा जा रहा है कि पार्टी के नेता हाग्रामा मोहिलारी ने तामुलपुर सीट का अपना उम्मीदवार तोड़े जाने की घटना से सबक लेकर अपने उम्मीदवारों को सिंगापुर भेज दिया है। सोचें, भाजपा ने क्या छवि बनाई है? लोग जिस तरह चोर-लुटेरों से अपनी नकदी या जेवर आदि बचाते हैं उसी तरह विरोधी पार्टियों को अपने विधायक या संभावित विधायकों को बचाना पड़ रहा है।

असम की दूसरी पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के करीब 20 उम्मीदवारों को जयपुर में छिपाया गया है। पार्टी के नेता बदरूद्दीन अजमल के अनुरोध पर कांग्रेस ने उन्हें अपने शासन वाले राज्य राजस्थान में लाकर अपने नेताओं को छिपाने का बंदोबस्त किया। बताया जा रहा है कि सचिन पायलट की बगावत के समय कांग्रेस पार्टी ने जहां अपने विधायकों को छिपाया था वहीं पर अजमल के उम्मीदवारों को रखा गया है। जल्दी ही कांग्रेस के भी कुछ उम्मीदवार राजस्थान लाए जाएंगे। कुछ लोगों को छत्तीसगढ़ भी भेजा जा सकता है। असल में चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में ही बता दिया गया था कि राज्य में भाजपा को नुकसान हो रहा है और उसकी सीटें कम हो सकती हैं। तभी भाजपा के नेता अतिरिक्त विधायकों की जुगाड़ में लगे हैं ताकि चुनाव के तुरंत बाद सरकार बनाने का दावा किया जा सके। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन को उम्मीद दिख रही है कि अगर तोड़-फोड़ न हो तो वे अपनी सरकार बना सकते हैं।

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