आत्मनिर्भर बनाने वाली पुरानी योजनाएं कहां हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार के भाषण का बीज मंत्र ‘आत्मनिर्भरता’ था। उन्होंने इसके साथ वोकल फॉर लोकल का भी नारा दिया। उन्हें आत्मनिर्भरता अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा भी की। पर सवाल है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इससे पहले जो योजनाएं घोषित की गई थीं, उनका क्या हुआ? प्रधानमंत्री तो पिछले छह साल से देश को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। और देश के नागरिकों का एक बड़ा वर्ग चीन से आने वाली झालरें और छोटी-छोटी अनेक चीजों का बहिष्कार करते हुए वोकल फॉर लोकल का अभियान भी चला रहा है। सो, यह बताना चाहिए उन सबका क्या हुआ?

सबसे पहले को मेक इन इंडिया के बारे में बताना चाहिए कि इस अभियान से भारत को आत्मनिर्भर बनाने में कितनी सफलता मिली। मेक इन इंडिया असल में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू किए गए अभियान का पहला कदम है। दूसरा कदम स्टार्ट अप इंडिया था। इस योजना का भी बड़े धूम-धड़ाके प्रचार किया गया और हजारों करोड़ रुपए के कर्ज भी बांटे गए। इसका तीसरा कदम मुद्रा योजना थी, जिसके तहत लोगों को छोटे से बड़े कर्ज दिए जाते थे ताकि वे स्वरोजगार शुरू करके आत्मनिर्भर बनें। सरकार का दावा था कि पकौड़े के ठेले लगाने सहित कई कामों में करीब आठ करोड़ लोगों को उसने स्वरोजगार दिया यानी उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। हकीकत यह है कि मुद्रा योजना के तहत दिया गया ज्यादातर कर्ज एनपीए हो गया है और बैंकों की खराब हालत के पीछे इसका भी हाथ है।

सवाल है कि जब मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया आदि के सहारे आत्मनिर्भरता की इतनी सारी योजनाएं पहले से चल रही हैं तो एक नए अभियान की क्या जरूरत आन पड़ी? क्या पहले की योजनाएं फेल हो गई हैं या उनसे वांछित नतीजे हासिल नहीं हुए हैं, इसलिए सबको मिला कर एक नई योजना शुरू हो रही है? जितना धूम-धड़ाका हुआ है उससे यह अंदेशा है कि कहीं इसका भी हस्र पहले जैसी योजनाओं जैसा न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares