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राम मंदिरः कांग्रेस चुप रहे तो बेहतर!

लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी का जमीन से पूरी तरह से नाता टूट गया है और पार्टी के प्रवक्ताओं से लेकर शीर्ष नेता सब सोशल मीडिया में खबरें देख कर प्रतिक्रिया देने को आतुर रहते हैं। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें भाजपा का मुख्य मुद्दा अयोध्या का राम मंदिर है। इसलिए बेहतर होता कि राम मंदिर से जुड़े किसी भी मसले पर कांग्रेस या तो चुप रहती या सोच समझ कर बयान देती। लेकिन चूंकि सपा और आप के नेता बयान दे रहे थे और बयान सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहे थे इसलिए हम कहीं पीछे न छूट जाएं, इस सोच में प्रियंका गांधी वाड्रा से लेकर रणदीप सुरजेवाला तक ने जमीन खरीद में घोटाले का आरोप लगा दिया।

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असल में राम जन्मभूमि की जमीन खरीद को लेकर जिस घोटाले की बात कही जा रही है वह पहली नजर में कोई घोटाला नहीं लग रहा है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सनसनी बनाने के लिए उसे यह ट्विस्ट दिया कि पांच मिनट में दो करोड़ की जमीन साढ़े 18 करोड़ की हो गई। असल में दो करोड़ की जमीन पांच मिनट में नहीं, बल्कि 10 साल में साढ़े 18 करोड़ की हुई है। दो करोड़ रुपए में एक सौ बिस्वा जमीन का सौदा 2011 में हुआ था और उसी जमीन को मार्च 2021 में साढ़े 18 करोड़ रुपए में बेचा गया। विपक्ष के नेता क्या चाहते हैं कि जो जमीन 10 साल पहले दो करोड़ की थी वह आज भी दो करोड़ में ही बिकती?

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ग्यारह साल पहले 2010 में फिरोज खान नाम के एक व्यक्ति ने 180 बिस्वा जमीन बबलू पाठक नाम के एक व्यक्ति को बेची। बबलू पाठक ने इसमें से 80 बिस्वा जमीन अपने पास रखी और एक सौ बिस्वा जमीन का सौदा नन्हें मियां के साथ कर लिया। सौदा दो करोड़ रुपए में हुआ था, जिसमें से 10 लाख रुपए बबलू पाठक को एडवांस मिले थे। नन्हे मियां और बबलू पाठक के परिवारों में अच्छे संबंध थे इसलिए दोनों ने सौदा बनाए रखा। जब राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो अचानक जमीन की कीमत बढ़ने लगी। कुछ जमीन सरकार खरीदने लगी तो कुछ निजी कंपनियां होटल, रिसॉर्ट आदि के लिए खरीदने लगीं। राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने भी बढ़ी हुई कीमत पर जमीन खरीदी है।

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अब सवाल है कि इसमें पांच मिनट वाली सनसनी कहां से आई। असल में जब नन्हें मियां के बेटे सुल्तान अंसारी और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के बीच जमीन का सौदा हो गया तो सुल्तान अंसारी ने बचे हुए एक करोड़ 90 रुपए बबलू पाठक को देकर उनसे जमीन का बयनामा अपने नाम कराया और फिर हाथ के हाथ उसकी रजिस्टरी राम जन्मभूमि ट्रस्ट को कर दी। यह एक तकनीकी प्रक्रिया थी, जो पांच मिनट में पूरी हुई। सो, इसे मुद्दा बनाने का कोई मतलब नहीं है। फिर भी सपा या आप ने बनाया तो उन्हें बनाने देते। शिव सेना इस आंदोलन से जुड़ी रही है और चंदा भी दिया है इसलिए अगर वे चंदे का हिसाब मांग रहे थे तो उन्हें मांगने देते, कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं के इस विवाद में कूदने की क्या जरूरत थी?

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