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राजरंग| नया इंडिया| Azad party political crisis आजाद की पार्टी में संकट

आजाद की पार्टी में संकट

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गुलाम नबी आजाद ने बड़े धूम धड़ाके से अपनी पार्टी का गठन किया था। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़ कर उनके साथ जुड़े थे, जिसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री ताराचंद भी शामिल थे। पूर्व मंत्री मनोहर लाल शर्मा और जम्मू इलाके के कई बड़े नेता उनके साथ जुड़े थे। उनकी डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी को कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के लिए बड़ा खतरा बताया गया था। लेकिन अब खुद आजाद की पार्टी संकट में है। कुछ नेताओं को वे पार्टी से निकाल रहे हैं तो बड़ी संख्या में नेता उनकी पार्टी छोड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके सख्त व अलोकतांत्रिक रवैए से पार्टी के नेता नाराज हैं तो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कश्मीर पहुंचने से पहले कांग्रेस के कई पुराने नेता वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

असल में प्रदेश के नेताओं को लग रहा है कि आजाद की पार्टी का भविष्य नहीं है। चुनाव से पहले भाजपा के साथ उनका तालमेल नहीं होगा और दूसरी ओर पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ने की ज्यादा संभावना है। इसलिए जम्मू क्षेत्र के जो हिंदू नेता आजाद के साथ जुड़े थे या तो वे सीधे भाजपा से जुड़ जाएंगे या कांग्रेस में लौट जाएंगे। बहरहाल, आजाद ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के नाम पर ताराचंद को पार्टी से निकाला, जो एक बड़े दलित नेता हैं। उनके अलावा मनोहर लाल शर्मा, विनोद शर्मा जैसे नेता हटाए गए, जिसके बाद 126 नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। पार्टी छोड़ने वालों में एमके भारद्वाज भी थे, जो जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। कहा जा रहा है कि राहुल की यात्रा कश्मीर पहुंचेगी तो आजाद की पार्टी के और भी नेता कांग्रेस में शामिल होंगे।

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