बंगाल में भी स्थानीय मुद्दों पर फोकस

ऐसा नहीं है कि दिल्ली के चुनाव नतीजों के बाद सिर्फ दिल्ली में बैठे भाजपा नेताओं के सुर बदले हैं, बल्कि सुदूर पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के नेताओं के सुर भी बदल रहे हैं और चुनावी एजेंडा भी बदल रहा है। प्रदेश भाजपा के नेताओं ने संकेत दिया है कि पार्टी स्थानीय मुद्दों पर फोकस करेगी। ध्यान रहे दिल्ली के चुनाव में लोकल नैरेटिव नदारद होने का भाजपा को नुकसान हुआ। उसके सारे नेता राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे थे। ऐसे मुद्दों पर प्रचार हो रहा था, जिससे दिल्ली के लोगों का ज्यादा लेना देना नहीं था। अनुच्छेद 370, नागरिकता कानून, तीन तलाक, राम मंदिर आदि के मसले पर भाजपा के नेता वोट मांग रहे थे।

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का समूचा फोकस स्थानीय मुद्दों पर था। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य को मुद्दा बनाया था। वे मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर वोट मांग रहे थे और भाजपा के नेता शाहीन बाग के मुद्दे पर वोट मांग रहे थे। भाजपा ने दिल्ली के चुनाव नतीजों के बाद पिछले एक हफ्ते में कई बार नतीजों की समीक्षा के लिए बैठक की है और उसका लब्बोलुआब यह है कि विधानसभा के चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे कम और स्थानीय मुद्दे खास कर गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे ज्यादा होने चाहिए। तभी पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रदेश ईकाई ने स्थानीय मुद्द उठाने का फैसला किया है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि पार्टी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी का मुद्दा छोड़ देगी। पार्टी ने रणनीति के तहत एनआरसी को स्थानीय मुद्दा बनाने का फैसला किया है। राज्य के जिन इलाकों, जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है वहां एनआरसी का मुद्दा रहेगा। बाकी हिस्सों में ममता बनर्जी सरकार के कामकाज पर हमला होगा और गवर्नेंस से जुड़े वादे किए जाएंगे। राष्ट्रीय नेता भी इसी तर्ज पर प्रचार करेंगे।

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