कोई अपना हित नहीं छोड़ना चाहता

चीन का विरोध सबको करना है पर कोई अपना हित नहीं छोड़ना चाहता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, बीसीसीआई के आयोजनों की प्रायोजक चीन की फोन कंपनियां हैं। भारतीय खिलाड़ियों की जर्सी पर चीन की फोन कंपनी ओप्पो का विज्ञापन लगा होता है। इससे बीसीसीआई को सैकड़ों करोड़ रुपए मिलते हैं। इनके बहिष्कार के बारे में पूछे जाने पर बोर्ड के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने बताया कि इससे मिलने वाले पैसे सौरव गांगुली, जय शाह या धूमल की जेब में नहीं जाते हैं। इस तरह से उन्होंने साफ कर दिया कि छोटे-छोटे कारोबारियों को चीन का बहिष्कार करना है तो करे बीसीसीआई नहीं करेगी। ध्यान रहे बीसीसीआई के सचिव जय शाह देश के गृह मंत्री अमित शाह के बेटे हैं और सचिव अरुण धूमल देश के वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के भाई हैं।

इसी तरह आईपीएल सहित बीसीसीआई और आईसीसी के सारे आयोजनों के प्रसारण का अधिकार खरीदने वाले स्टार समूह के भारत के प्रमुख उदय शंकर ने भी चुप्पी साधी है। वे भी चीन की कंपनियों के साथ अपना करार खत्म नहीं करना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई से प्रसारण का अधिकार 36 सौ करोड़ रुपए में खरीदा है, जिसका आधे से थोड़ा कम हिस्सा अकेले चीन की मोबाइल कंपनियां देती हैं। इसी तरह गुजरात और देश के कई बड़े कारोबारी चीन के साथ अपना संबंध खत्म करने को राजी नहीं हैं। तभी सवाल है कि सिर्फ भारत संचार निगम लिमिटेड, बीएसएनएल को क्यों मजबूर किया जा रहा है कि वह चीन से सामान नहीं खरीदे? पहले ही एक निजी मोबाइल कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए बीएसएनएल का भट्ठा बैठा दिया गया है और अब फिर चीन विरोध के नाम पर भी उसे ही खत्म करने का प्रयास हो रहा है।

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