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Saturday, April 17, 2021
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बंगाल पर ऐसी मेहरबानी क्यों?

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केंद्रीय चुनाव आयोग ने कमाल किया। उसने 234 विधानसभा सीट वाले तमिलनाडु में तो एक चरण में छह अप्रैल को मतदान कराने का फैसला किया लेकिन 294 सीट वाले पश्चिम बंगाल में आठ चरण में चुनाव का ऐलान किया। आयोग 140 सीट वाले केरल में एक चरण में चुनाव करा रहा है और 126 सीट वाले असम में तीन चरण में चुनाव करा रहा है। पिछले साल 224 सदस्यों की बिहार विधानसभा का चुनाव भी तीन चरण में ही हुआ था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चुनाव आयोग ने लोकसभा और दो बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए थे और तब सात चरण में चुनाव निपट गया था लेकिन इस बार अकेले पश्चिम बंगाल में आठ चरण में चुनाव होगा।

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने इस शिड्यूल को लेकर सवाल उठाया। हालांकि उनका हमला राजनीतिक था और ममता ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दौरे के हिसाब से चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है। लेकिन राजनीति से अलग हट कर इसके प्रशासनिक और व्यावहारिक पक्ष को भी समझने की जरूरत है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है, जो बंगाल में इतना लंबा चुनाव कराना पड़ रहा है? क्या चुनाव आयोग ने कोई ऐसी रिपोर्ट मंगाई है, जिसमें यह कहा गया है तमिलनाडु या केरल में हिंसा नहीं होगी और बंगाल में बड़ी हिंसा होगी? ध्यान रहे भाजपा जिस तरह आरोप लगाती है कि बंगाल में उसके कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं उसी तरह के आरोप वह केरल को लेकर भी लगाती है। केरल में भी भाजपा-संघ के कार्यकर्ताओं के मारे जाने के आरोप लगते हैं। लेकिन वहां तो एक चरण में मतदान होगा!

ध्यान रहे बंगाल में नक्सलवाद अब लगभग खत्म हो गया। जंगलमहल का इलाका साफ हो गया है। अलग गोरखा राज्य का आंदोलन कब का शांत हो गया और आंदोलन चलाने वाली पार्टियां चुनावी राजनीति में हिस्सा ले रही हैं। अब पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बल उपलब्ध हैं और आधुनिक तकनीक भी है फिर भी आठ चरण में चुनाव कराने का तर्क समझ से परे है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पिछली बार सात चरण में चुनाव हुए थे तो इस बार आठ चरण में चुनाव होना बड़ी बात नहीं है। असल में यह बड़ी बात है क्योंकि पहले सात चरण में हुआ था तो अब तरक्की होने के बाद कम चरण में होना चाहिए, जैसा बिहार में हुआ। बंगाल का क्षेत्रफल तमिलनाडु से कम है, आबादी और सीटों की संख्या मामूली ज्यादा है। तभी आठ चरणों में चुनाव की घोषणा करके आयोग ने गलत नजीर पेश की है। आयोग ने 26 फरवरी को चुनाव की घोषणा की और दो मई को नतीजे आने तक अब दो महीने से ज्यादा समय तक राज्य की सत्ता चुनाव आयोग के हाथ में रहेगी।

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