मोदी ने ममता को नहीं दी बधाई

यह कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी को जन्मदिन की बधाई नहीं दी। लेकिन चूंकि बंगाल में अगले चार महीने में विधानसभा का चुनाव होना है इसलिए यह जिक्र के लायक बात है। यह जिक्र के लायक बात इसलिए भी है कि ममता बनर्जी की पार्टी मौजूदा लोकसभा की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा ममता बनर्जी ने पिछले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को उनके 70वें जन्मदिन के मौके पर बधाई दी थी। इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने उनको बधाई नहीं दी।

ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं को जन्मदिन की बधाई नहीं देते हैं। वे संभवतः हर महत्वपूर्ण विपक्षी नेता को बधाई देते हैं और मुख्यमंत्रियों को तो जरूर बधाई देते हैं। उनके ट्विटर हैंडल की टाइमलाइन पर देखा जा सकता है कि उन्होंने पिछले साल पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह, ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और यहां तक कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी बधाई दी। प्रधानमंत्री कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को भी उनके जन्मदिन की बधाई देते हैं। लेकिन ममता को बधाई देना जरूरी नहीं समझा तो उसकी जरूर कोई वजह होगी।

वैसे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों का एक-दूसरे को बधाई देना सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा होता है, जिसमें राजनीति को नहीं शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा लग रहा है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में जिस तरह से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं और भाजपा के नेता जिस अंदाज में ममता पर हमला कर रहे हैं संभवतः उसी वजह से मोदी ने ममता को बधाई नहीं दी। वे पहले भी ममता को बधाई नहीं देते थे। इससे यह भी लगता है कि उनके दिमाग में शुरू से बंगाल की राजनीति है और यह सोच है कि ममता के प्रति कोई सद्भाव नहीं दिखाना है।

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