भारत बंद में केजरीवाल का नाटक!

अरविंद केजरीवाल को दूसरे के आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने की आदत लग गई है। इसलिए उन्होंने किसानों के आंदोलन का फायदा उठाने का भी जी-तोड़ प्रयास किया है। उनको लग रहा है कि किसान आंदोलन कर रहे हैं और इसमें कुछ ऐसा नाटक करना चाहिए, जिससे पंजाब और हरियाणा दोनों जगह यह मैसेज जाए कि केजरीवाल की पार्टी इस आंदोलन में किसानों के साथ है। हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी उनके साथ नहीं है। बाकी पार्टियां किसानों की इस बात का सम्मान भी कर रही हैं पर केजरीवाल को इससे फर्क नहीं पड़ रहा है। वे किसानों के भारत बंद से एक दिन पहले सिंघू बॉर्डर पर पहुंच गए, जहां किसान पिछले करीब दो हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने और उनकी पार्टी ने ट्विट कर-कर के ऐसा दिखाया, जैसे सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन का सारा बंदोबस्त उन्होंने किया है।

इसके अगले दिन यानी भारत बंद के दिन सुबह से केजरीवाल ने घर में नजरबंद किए जाने का नाटक शुरू कर दिया। सोशल मीडिया में माना जा रहा है कि भाजपा की केंद्र सरकार भी उनके इस नाटक में शामिल थी, जिसका मकसद किसानों के भारत बंद पर से ध्यान हटाना था। इसमें केजरीवाल काफी हद तक सफल भी रहे। मीडिया में खास कर चैनलों पर सारे दिन यह चलता रहा कि केजरीवाल नजरबंद हैं या नहीं हैं। उनके नेता भी उनके घर के बाहर पहुंच कर इस नाटक का हिस्सा बने।

केजरीवाल और उनकी पार्टी पिछले कई दिन से दिन में दस बार यह ट्विट करते हैं कि केंद्र सरकार ने उनसे स्टेडियम मांगे थे, किसानों के लिए अस्थायी जेल बनाने के वास्ते, उन्होंने नहीं दिया इसलिए केंद्र सरकार उनसे नाराज है। सोचें, कैसी मूर्खता की बात है! केंद्र सरकार को अगर दिल्ली में अस्थायी जेल बनानी होती तो उसके लिए जगह की कमी है? रेलवे के अपने स्टेडियम हैं, बीसीसीआई का स्टेडियम है और दूसरी कई जगहें हैं, जिन्हें अस्थायी जेल में बदला जा सकता था। कम से कम अभी तक केंद्र सरकार को इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई है। फिर भी दिन में दस बार केजरीवाल और उनकी पार्टी इस झूठ का ट्विट करती है।

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