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विकास की कहानी में बड़ा रहस्य है!

ईमानदारी से अगर दिल्ली में बैठे किसी पत्रकार से पूछा जाए कि उसने विकास दुबे का नाम कभी सुना था क्या, उसका जवाब नहीं में होगा। उत्तर प्रदेश के कुछ पत्रकारों को छोड़ दें तो ज्यादातर लोगों ने उसका नाम उसी दिन सुना, जिस दिन उसके घर पर पुलिस की भारी-भरकम टीम आधी रात के बाद छाप मारने और उसे पकड़ने गई थी। उससे पहले किसी ने उसका नाम नहीं सुना था। वह गांव स्तर का एक गुंडा था, जिसने अपनी पत्नी को नगर या जिला पंचायत स्तर पर कुछ चुनाव जितवाए थे। वह विधायक या सांसद नहीं बन पाया था, जिसके ऊपर 15-20 हजार रुपए का इनाम था। इससे भी उसके छोटे कद का अंदाजा लगता है।

उसके मुकाबले अब उत्तर प्रदेश के दूसरे बाहुबलियों को देखिए। मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी, अतीक अहमद, धनंजय सिंह, रघुराज प्रताप सिंह इन सबको सारा देश जानता है। इनके साथ कभी भी पुलिस की मुठभेड़ के हालात नहीं बने क्योंकि सब माननीय विधायक या सांसद बन चुके हैं। इनके अलावा भी अनेक गुंडे, बाहुबली हैं, जिनके बारे में लोग उत्तर प्रदेश के बाहर भी जानते हैं। फिर सवाल है कि अचानक विकास दुबे कैसे इतना बड़ा गुंडा, बाहुबली बन गया?

सबसे पहला सवाल तो यहीं उठता है कि आखिर एक लोकल गुंडे को पकड़ने के लिए आधी रात का ऑपरेशन क्यों प्लान किया गया था? वह पहले दो बार गिरफ्तार हो चुका था और अगर तीसरी बार भी गिरफ्तार हो जाता तो कोई आफत नहीं आ रही थी क्योंकि ज्यादातर मामलों में उसके खिलाफ कोई गवाह नहीं था। फिर भी उसे पकड़ने पुलिस की पूरी फौज भेजी गई, जिसमें से आठ पुलिसवाले मारे गए। असली मुठभेड़ में पुलिस विकास के एक भी गुंडे को नहीं मार सकी यहां तक की घायल भी नहीं कर सकी। वह तो बाद में पुलिस ने लोगों को पकड़-पकड़ कर मारना शुरू किया, जिसे इनकाउंटर का नाम दिया गया। बाद में वह इतना महत्वपूर्ण हो गया कि उसे पकड़ने और मारने के लिए सारे जतन किए गए। कई जानकार बता रहे हैं कि उसकी पत्नी और नाबालिग बेटे को पकड़ कर, घुटनों के बल बैठा कर फोटो खींचने और उसे जारी करने के पीछे भी मकसद विकास को डराना ही था क्योंकि जैसे ही विकास मारा गया, वैसे ही पत्नी और बेटा छोड़ दिए गए। इसलिए यह सचाई सामने आनी जरूरी है कि ऐसा क्या हुआ था, जिसकी वजह से रातों रात विकास दुबे को इतना बड़ा गुंडा बनाया गया और फिर मारा गया।

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