बिहार में पूरी होगी भाजपा की तलाश!

लोकसभा चुनाव के बाद से भारतीय जनता पार्टी एक एक बड़ी और स्पष्ट जीत की तलाश में है। भाजपा ने पिछले साल मई में जिस अंदाज में लोकसभा चुनाव जीता था, उसके बाद लग रहा था कि अब देश में सिर्फ भाजपा ही रहेगी और उसे कोई नहीं हरा पाएगा। पर हकीकत में ऐसा नहीं हुआ, बल्कि इसका उलटा हुआ। लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को बड़ा झटका लगा। उसके बाद हुए चार विधानसभा चुनावों- महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली में भाजपा को कहीं भी फायदा नहीं हुआ। भाजपा ने हरियाणा में सरकार जरूर बना ली लेकिन वह आधी अधूरी सरकार है। भाजपा की सरकार ओमप्रकाश चौटाला के पोते और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के भरोसे चल रही है। भाजपा की सीटें कम हुईं और सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी चौटाला परिवार को देकर भाजपा ने सरकार बनाई। बाकी तीन राज्यों में से भाजपा दिल्ली में पहले से सत्ता में नहीं थी और महाराष्ट्र व झारखंड की सत्ता से बाहर हो गई। भाजपा ने कर्नाटक और मध्य प्रदेश में जरूर सरकार बनाई है पर वह किस तिकड़म से बनी है यह सबको पता है।

सो, अब भाजपा को तलाश है एक अदद बड़ी और स्पष्ट जीत की और पार्टी के नेताओं को उम्मीद है कि बिहार में यह तलाश पूरी होगी। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर प्रभारी महासचिव भूपेंद्र यादव तक सब बिहार पर फोकस किए हुए हैं। ऐसे सारे उपाय किए जा रहे हैं कि किसी तरह से नीतीश कुमार के साथ सीटों का बंटवारा ठीक तरह से हो जाए। उससे पहले विपक्ष को कमजोर करने का भी प्रयास हो रहा है। भाजपा के नेता बिहार पर इसलिए भी ज्यादा ध्यान लगाए हुए हैं क्योंकि बिहार के बाद पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और पश्चिम बंगाल में भाजपा को अपना परचम फहराने के लिए बिहार से दरवाजा बन सकता है। अगर भाजपा बिहार में बड़ी जीत हासिल करती है तो बंगाल के चुनाव में उसे इसका निश्चित फायदा मिलेगा। पहले नजर में और अभी के समय में यह दिख भी रहा है कि बिहार में भाजपा के गठबंधन को एडवांटेज है। विपक्ष बिखरा हुआ है और उसके पास कोई भरोसा जगाने वाला चेहरा नहीं है। नीतीश कुमार के मुकाबले तेजस्वी का चेहरा हिट नहीं हो रहा है। ऊपर से लालू प्रसाद जेल में बंद हैं, जिसकी वजह से चुनाव के समय चले जाने वाले जरूरी दांव-पेंच में राष्ट्रीय जनता दल पिछड़ रही है। सो, ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा पिछले एक साल से जिस जीत की तलाश में है वह बिहार में पूरी हो सकती है। यह भी तय माना जा रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद बिहार में असली राजनीति होगी।

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