लोजपा क्या सचमुच राजद के संपर्क में है?

यह हैरान करने वाली बात है कि लोक जनशक्ति पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल के संपर्क में बताया जा रहा है। राजद के नेता तेजस्वी यादव 20 अक्टूबर में रामविलास पासवान के श्राद्धकर्म में हिस्सा लेने पहुंचे तो चिराग पासवान के साथ उनका जैसा सद्भाव दिखा और दोनों ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनदेखी करके आपस में बातचीत की, उसकी कई किस्म से व्याख्या हो रही है। इस बीच यह भी खबर आई है कि चिराग पासवान के चचेरे भाई और समस्तीपुर के सांसद प्रिंस पासवान ने गोपनीय तरीके से तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। खुद तेजस्वी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि चुनाव के बाद जरूरत पड़ने पर वे चिराग पासवान की मदद ले सकते हैं।

इन सब बातों से यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि चिराग और तेजस्वी आपस में मिले हुए हैं और चुनाव के बाद दोनों साथ आ सकते हैं। वैसे तो राजनीति में कुछ भी संभव है पर कम से कम अभी इसकी संभावना नहीं दिख रही है। अगर इस बात को स्वीकार किया जाए कि चिराग और तेजस्वी मिले हुए हैं तो भाजपा की शह पर चिराग के राजनीति करने की धारणा अपने आप खारिज होगी। तेजस्वी और चिराग के आपस में मिले होने की धारणा से भाजपा को यह सुविधा हो रही है वह नीतीश कुमार को भरोसा दिलाए कि चिराग से उसका कोई लेना देना नहीं है।

हकीकत यह है कि चिराग पासवान किसी हाल में राजद के साथ जाने की जोखिम नहीं ले सकते हैं। उनके पिता दो बार राजद के साथ चुनाव लड़े। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे राजद के साथ लड़े थे तो एक भी सीट नहीं मिली थी। वे खुद भी चुनाव हार गए थे। फिर 2010 के विधानसभा चुनाव में वे राजद के साथ लड़े तो सिर्फ चार सीटें जीत पाए थे। बिहार की सामाजिक संरचना में दोनों का गठबंधन सफल नहीं हो सकता है। दूसरे, इस चुनाव में बिहार में चिराग की पार्टी का दहाई में पहुंचना मुश्किल है। अगर जरूरत पड़ी तब भी इसके बदले में राजद से उनको बहुत कुछ नहीं मिलना है। इसके लिए वे केंद्र में मंत्री बनने की अपनी संभावना को नहीं खत्म करेंगे। उन्हें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनना है और 12, जनपथ का बंगला अपने पास रखना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares