बिहार में कुछ बड़ा बदलाव संभव!

बिहार में जल्दी ही कैबिनेट का विस्तार होना है। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आनन-फानन में राजभवन में ही शपथ ली और छोटा मंत्रिमंडल रखा गया। उसमें से भी बाद में एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। सो, अब बड़े विस्तार की तैयारी है। उससे पहले बिहार में कुछ बड़ा राजनीतिक बदलाव संभव है। कुछ पार्टियों का विलय भी संभव है और हो सकता है कि कुछ बड़े नेता दलबदल करें। मुख्यमंत्री अपनी सहयोगी भाजपा को भी जवाब देना चाहते हैं कि सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी राजद को भी सबक देना चाहते हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि वे राजद के कुछ बड़े नेताओं को संपर्क में हैं। अगले कुछ दिन में इसकी तस्वीर साफ होगी।

जानकार सूत्रों का कहना है कि राजद के दिग्गज नेता और दशकों तक मुस्लिम चेहरा रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी पाला बदल सकते हैं। उनके जदयू के संपर्क में होने की खबर पुरानी है लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार अपनी पारंपरिक केवटी सीट से हारने के बाद वे परेशान हैं। राजद अभी उनको विधान परिषद भेजने की स्थिति में नहीं है। तभी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार उनको राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में भेज कर राज्य सरकार में मंत्री बना सकते हैं।

इससे बड़ा उलटफेर यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार के पुराने साथी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय जदयू में करें। इस बात की चर्चा चुनाव के पहले से हो रही है और एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है। ध्यान रहे उपेंद्र कुशवाहा पहले जदयू में थे और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार उनको भी राज्यपाल कोटे  से विधान परिषद में भेज कर बिहार का शिक्षा मंत्री बना सकते हैं। कुशवाहा केंद्र सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री थे और इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शिक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया था। अगर ये दोनों काम होते हैं तो बिहार की राजनीति बहुत बदलेगी।

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