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बिहार में सीपीआई का कन्हैया कार्ड

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार भले बेगूसराय सीट से लोकसभा का चुनाव हार गए पर एक नेता के तौर पर वे बहुत मजबूती से स्थापित हो गए हैं। राष्ट्रीय जनता दल की ओर से बेगूसराय सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाने के बावजूद कन्हैया दूसरे स्थान पर रहे थे और उनको चार लाख के करीब वोट मिला। इससे बिहार में सीपीआई की उम्मीदें बढ़ी हैं और उनको लग रहा है कि कन्हैया का नेतृत्व आगे करके पार्टी अपने गौरवशाली दिन वापस हासिल कर सकती है। संयुक्त बिहार में सीपीआई की एक बड़ी ताकत रही है। बिहार की पिछड़ी जातियों और मुस्लिमों के अलावा सवर्णों का एक बड़ा तबका सीपीआई के साथ जुड़ा रहा है।

पिछले कुछ समय में सीपीआई की ताकत पूरी तरह से खत्म हो गई है। अगर कम्युनिस्ट पार्टियों में थोड़ी बहुत ताकत बची भी है तो वह सीपीआई माले की है। पर इस साल के विधानसभा चुनाव से पहले सीपीआई ने काफी अरसे बाद आक्रामक तरीके से अपने कार्यक्रम शुरू किए हैं। अगले एक महीने में कन्हैया कुमार की 50 से ज्यादा सभाओं का कार्यक्रम बना है। उन्होंने चंपारण में महात्मा गांधी के भितिहरवा आश्रम से अपने प्रदर्शनों की शुरुआत की। उनकी सभाओं में हजारों की संख्या में लोग जुट रहे हैं। लोगों की भीड़ स्वंयस्फूर्त है। पुलिस ने उनके कार्यक्रमों पर रोक लगाई तो बताया जा रहा है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिस को फटकार लगाई। ऐसा लग रहा है कि साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में सीपीआई एक निश्चित भूमिका निभाएगी।

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