बिहार में कितने सीएम दावेदार?

इस बार बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की बहार है। आधा दर्जन मुख्यमंत्री दावेदार मैदान में हैं। इनमें से एक को छोड़ कर बाकी लोग चुनाव बाद मुख्यमंत्री के पूर्व दावेदार के तौर पर अपना परिचय देंगे। बहरहाल, बिहार में पहले कभी मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर ज्यादा लोग चुनाव नहीं लड़ते थे। पिछले 15 साल से तो इकलौते दावेदार नीतीश कुमार ही हैं। 2005 में जरूर राबड़ी देवी दावेदार थीं तो वह भी इसलिए क्योंकि वे उस समय निवर्तमान मुख्यमंत्री थीं। पिछला चुनाव भाजपा ने अलग होकर लड़ा था और उसने मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं घोषित किया था। सो, इकलौते दावेदार नीतीश थे। यानी 15 साल वे इस खेमे में रहे या उस खेमे में, चुनाव मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर लड़ा।

इस बार नीतीश कुमार एनडीए के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में लड़ रहे हैं। इस बार सबसे ज्यादा जोर-शोर से कहा जा रहा है कि चुनाव बाद वे मुख्यमंत्री बनेंगे और इसलिए संदेह भी ज्यादा हो रहा है। उनके अलावा महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर लड़ रहे हैं। उनकी दिली इच्छा थी कि वे मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में लड़ें। सो, कई किस्म की कुर्बानियों के बाद उनको महागठबंधन का मुख्यमंत्री दावेदार घोषित कर दिया गया।

इन दो के आमने सामने के मुकाबले के अलावा कई सहायक अभिनेता किस्म के दावेदार हैं। तीसरे मोर्चे यानी ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस की ओर से उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री पद का दावेदार हैं। उनके गठबंधन में मायावती और ओवैसी की पार्टी है और सबने मिल कर उनको दावेदार घोषित किया है। चौथे दावेदार पप्पू यादव हैं, जिनकी जन अधिकार पार्टी भी भीम आर्मी और कुछ दूसरी पार्टियों के साथ एक एलायंस बना कर लड़ रही है। पांचवीं दावेदारी प्लूरल्स पार्टी बना कर मैदान में उतरीं लंदन रिटर्न पुष्पम प्रिया चौधरी हैं। उन्होंने अखबारों में विज्ञापन देकर खुद को सीएम का दावेदार घोषित किया था। हालांकि उनका अपनी सीट से जीत पाना भी बहुत मुश्किल लग रहा है। भाजपा अभी तो नीतीश को सीएम बनाने की बात कर रही है पर उसकी तरफ से चुनाव लड़वा रहे कई नेता अघोषित दावेदार हैं।

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