नड्डा की कमान में पांचवां चुनाव

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के पार्टी की कमान संभालने के बाद विधानसभा का तीसरा चुनाव हो रहा है। वे इस साल जनवरी में पार्टी अध्यक्ष बने थे। नड्डा ने 20 जनवरी को विधिवत पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था। परंतु उससे पहले जून 2019 से वे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम संभाल रहे थे। तब केंद्र सरकार में गृह मंत्री बन जाने के बावजूद अमित शाह ही अध्यक्ष थे पर पार्टी का कामकाज नड्डा देखने लगे थे। उनके कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तीन राज्यों- महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं और अब बिहार में चुनाव चल रहा है।

उनके कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद जिन चार राज्यों में चुनाव हुए हैं उनमें से सिर्फ हरियाणा में पार्टी की सरकार बन पाई है। वह भी दुष्यंत चौटाला की क्षेत्रीय पार्टी की मदद से। पिछले साल हुए चुनाव में हरियाणा में भाजपा की सीटों में कमी आई थी, जिसकी वजह से उसे जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री बना कर सरकार बनानी पड़ी। महाराष्ट्र में भी भाजपा की सीटें पिछले चुनाव से कम हुई थीं और अंत में वह शिव सेना के साथ सरकार नहीं बना सकी। बाद में शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सरकार बनाई। झारखंड में पार्टी चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हुई।

जिस समय नड्डा पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष बने उस समय दिल्ली में विधानसभा के चुनाव चल रहे थे। उस चुनाव में भाजपा की सीटों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई फिर भी पार्टी दहाई में नहीं पहुंच सकी। दिल्ली क 70 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा को महज आठ सीटें मिलीं। बतौर कार्यकारी अध्यक्ष और फिर पूर्णकालिक अध्यक्ष उनकी कमान में जो चुनाव हुए हैं उनमें भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। तभी अब सबकी नजर बिहार के विधानसभा चुनाव पर है, जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनने की लड़ाई लड़ रही है।

वैसे बिहार विधानसभा का चुनाव भी पूरी तरह से पार्टी के प्रभारी महासचिव भूपेंद्र यादव लड़वा रहे हैं। गठबंधन तय करने से लेकर सीटों के बंटवारे और टिकट बंटवारे तक में उनकी कमान  साफ साफ दिखी है। जहां वे थोड़े कमजोर रहे वहां फैसला पार्टी के प्रदेश के सबसे बड़े नेता सुशील कुमार मोदी ने कराया। इसके बावजूद जेपी नड्डा सक्रिय रहे। उनके घर पर बैठकें होती रहीं और अभी वे लगातार बिहार में रैलियां कर रहे हैं। पार्टी के पिछले अध्यक्ष अमित शाह इस बार प्रचार में नहीं हैं और चुनाव से जुड़ी किसी गतिविधि में उनके सक्रियता से शामिल होने की भी खबर नहीं है। तभी नतीजों की पूरी जिम्मेदारी नड्डा पर होगी। अगर भाजपा जीतती है और अपने इतिहास में पहली बार बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो पार्टी में नड्डा की कमान मजबूती से स्थापित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनके ऊपर भरोसा बढ़ेगा और वे चुनाव जिताने वाले अध्यक्ष के रूप में देखे जाएंगे।

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