मोदी पर क्यों नहीं बोल रहे हैं तेजस्वी?

महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद तीखा हमला किया। उन्होंने तेजस्वी को जंगलराज का युवराज कहा। उन्होंने तेजस्वी और उनकी पार्टी को लक्ष्य करके कहा कि किडनैपिंग इंडस्ट्री का कॉपीराइट इन्हीं लोगों के पास है। इतने स्पष्ट और तीखे हमले के बाद भी राजद के नेता प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नहीं बोल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने राजद के ऊपर कमीशनखोर होने का आरोप भी लगाया पर राजद के नेताओं ने पलट कर एक बार भी केंद्र की सरकार पर भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप नहीं लगाए। राफेल विमान सौदे से लेकर अंबानी-अडानी की बातें भी किसी ने नहीं कही।

राजद की सहयोगी कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने अंबानी-अडानी का जिक्र किया और आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। पर  राजद के नेता इस बात को नहीं दोहरा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मोदी देश के पीएम हैं, कुछ भी बोल सकते हैं। इसके आगे तेजस्वी का कहना था कि बेरोजगारी, भुखमरी पर भी बोल लेते। असल में उनको लग रहा है कि वे मोदी पर हमला करेंगे तो हिंदू वोट बिदकेगा और भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हो जाएगा। परंतु चुप्पी साधे रहने और मोदी पर हमला नहीं करने का अलग तरह से नुकसान हो रहा है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को यह प्रचार करने में मदद मिल रही है कि राजद और भाजपा मिले हुए हैं और चुनाव के बाद दोनों साथ आ सकते हैं। इस प्रचार की वजह से सीमांचल के इलाके में ओवैसी की पार्टी को फायदा हो सकता है, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस और राजद को होगा। मोदी की बातों का जवाब नहीं देने से राजद के कोर वोट आधार में कंफ्यूजन है। मुस्लिम बहुलता वाली सीटों पर राजद को लेकर संशय है तो भाजपा के यादव उम्मीदवारों के समर्थन में यादव मतदाताओं का रूझान भी दिख रहा है।

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