लालू के नाम से मुक्ति चाहते हैं तेजस्वी

तेजस्वी यादव की सारी राजनीति लालू प्रसाद के बनाए जातीय और सामाजिक समीकरण पर टिकी है लेकिन इस बार वे चाहते हैं कि वोटिंग लालू प्रसाद के नाम पर न हो। एक तरफ भाजपा और जदयू दोनों ने लालू प्रसाद के नाम का मुद्दा बनाया है तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव अपने पिता के नाम से छुटकारा पाने की जद्दोजहद में लगे हैं। तभी लालू-राबड़ी के आवास के बाहर लगे होर्डिंग से लेकर पटना और राज्य के हर हिस्से में राजद ने जो पोस्टर, होर्डिंग्स लगाए हैं उनमें लालू प्रसाद की फोटो नहीं है। ज्यादातर जगहों पर राबड़ी देवी की तस्वीर भी नदारद है। हर जगह पार्टी तेजस्वी यादव का चेहरा दिखा रही है।

असल में तेजस्वी ने पिछले चुनाव से सबक लिया है। 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद खूब सक्रिय थे और चुनावी राजनीति कर रहे थे पर चेहरा नीतीश कुमार का दिखाया जा रहा था। इसलिए भाजपा और तब की उसकी दूसरी सहयोगियों के प्रचार का ज्यादा असर नहीं हुआ। उसी तर्ज पर इस बार तेजस्वी अपना चेहरा दिखा रहे हैं। लोगों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि लालू प्रसाद वाली राजनीति अब अतीत की बात है। वे हर जाति और समाज के लोगों को टिकट दे रहे हैं ताकि सिर्फ एक जाति की पार्टी होने का राजद की छवि टूटे। इसमें उनको कितनी कामयाबी मिलेगी यह चुनाव के बाद पता चलेगा। पर इतना तय है कि भाजपा और जदयू तो लालू प्रसाद के नाम पर और उनका चेहरा दिखा कर ही चुनाव लड़ेंगे।

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