तेजस्वी, चिराग और कन्हैया का साझा बनेगा क्या?

बिहार में इस बार तीन युवा नेताओं की चर्चा है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और सांसद चिराग पासवान और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के फायर ब्रांड नेता कन्हैया कुमार की राजनीति को लेकर बिहार में बहुत चर्चा हो रही है। ध्यान रहे कन्हैया बहुत चर्चित बेगूसराय लोकसभा सीट से लड़े थे, जहां से भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह लड़ रहे थे। यह गिरिराज सिंह और कन्हैया के बीच आमने सामने की लड़ाई थी पर राजद ने क मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतार दिया, जिससे वोट का बुरी तरह से बंटवारा हुआ।

तब इस बात की चर्चा हुई थी कि लालू प्रसाद नहीं चाहते थे कि भाजपा विरोधी राजनीतिक स्पेस में कन्हैया जैसा कोई नेता उभरे। लालू और उनका परिवार कन्हैया को तेजस्वी और तेज प्रताप की राजनीति के लिए खतरा मान रहे थे। ध्यान रहे कन्हैया जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं और उनकी छवि अखिल भारतीय नेता की बन गई है। वे भाजपा विरोधी राजनीति के सबसे मुखर और चर्चित चेहरों में से एक हैं।

बहरहाल, अब इस बात की चर्चा हो रही है कि तेजस्वी और कन्हैया की टीम बन सकती है, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है। वैसे भी राजद के नेता इस बार लेफ्ट पार्टियों से तालमेल की जुगाड़ में हैं। हैरानी की बात यह है कि भाजपा और जदयू से लोजपा की नाराजगी के बाद कई जानकार नेता यह सदिच्छा भी जाहिर करने लगे हैं कि अगर चिराग पासवान भी इन दोनों नौजवान नेताओं के साथ जुड़ जाएं तो नीतीश का चेहरा प्रोजेक्ट होने के बावजूद एनडीए की दशा वैसी हो सकती है, जैसी 2015 के विधानसभा चुनाव में हुई थी। वैसे यह दूर की कौड़ी है पर राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।

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