तेजस्वी का मोदी और केजरीवाल कार्ड!

राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार में महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव के पहले दो चरण में जो नहीं किया था वह तीसरे चरण से पहले कर दिया। उन्होंने तीसरे चऱण का प्रचार बंद होने से पहले एक सभा में कहा कि अब उनकी लड़ाई नरेंद्र मोदी से है। तीसरे चरण की 78 सीटों के लिए होने वाले मतदान से ठीक पहले तेजस्वी का यह कहना बहुत मायने वाला है। इन सीटों पर मुस्लिम आबादी एक चौथाई के करीब है और साथ ही इन सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की मुस्लिम उम्मीदवार भी हैं तो नीतीश कुमार की पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवार भी हैं। सो, मुस्लिम वोट न बंटे इस चिंता में तेजस्वी ने यह बयान दिया है।

क्या इस तरह का बयान देकर तेजस्वी ने रणनीतिक गलती कर दी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अगर मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण महागठबंधन के पक्ष में होता है तो संभव है कि हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भी एनडीए के और खास कर भाजपा के पक्ष में हो। तेजस्वी यादव अपने मुस्लिम-यादव और कुछ राजपूत वोट के दम पर सीमांचल का मैदान मार लेने के भरोसे में हैं। इसलिए उन्होंने मुस्लिम वोट नहीं टूटने पर ज्यादा ध्यान दिया है। दूसरी ओर भाजपा के नेता जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे पर ध्रुवीकरण करा रहे हैं। इससे मतदान से पहले उलटफेर की संभावना बनी है।

तेजस्वी यादव ने अरविंद केजरीवाल वाला दांव भी तीसरे चरण से पहले चला। हैरानी है कि उन्होंने पहले यह दांव क्यों नहीं चला? केजरीवाल की पार्टी इस बार बिहार में चुनाव नहीं लड़ रही है। सो, वे उनके नाम का इस्तेमाल कर सकते थे। फिर भी देर आए, दुरुस्त आए। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग केजरीवाल की तरह क्लीन स्लेट चाहते हैं। वे अपने को बार बार कोरा कागज या क्लीन स्लेट बता रहे हैं। और कह रहे हैं इस पर जनता जो चाहेगी वहीं इबारत लिखी जाएगी। केजरीवाल के नाम से युवाओं में वे अपनी अपील बना सकते हैं।

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