महिला वोटों पर सबकी दावेदारी

बिहार में इस बार चुनाव लड़ रही सभी पार्टियां महिला वोटों की बराबर दावेदारी कर रही हैं। हालांकि पारंपरिक रूप से पिछले 15-20 साल से महिलाओं को नीतीश कुमार का समर्थक माना जाता है। पिछले चार विधानसभा चुनावों में ज्यादातर महिलाओं ने नीतीश के समर्थन में वोट किया है। ऊपर से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद महिलाओं का वोट एनडीए के साथ और कंसोलिडेट हुआ है। पर इस बार कांग्रेस व राजद ने भी अच्छी संख्या में महिलाओं को टिकट दी है और प्रतीकात्मक रूप से ऐसी महिलाओं को चुना है, जिनको महिलाओं के हर वर्ग में पसंद किया जा रहा है।

आमतौर पर बिहार में पहले बाहुबली नेताओं की बेटियों, पत्नियों को टिकट मिलती थी। जो चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाते थे उनके परिवार से टिकट दिया जाता था। इस बार भी ऐसा हुआ है। बलात्कार के आरोप में जेल में बंद राजवल्लभ यादव की पत्नी को राजद ने टिकट दिया है। फरार आरोपी अरुण यादव की पत्नी भी राजद से लड़ रही हैं। पर इनके अलावा राजद ने रितु जायसवाल को टिकट देकर एक बड़ा मैसेज दिया है। रितु जायसवाल दिल्ली से पढ़ कर गई हैं और उनके पति बड़े अधिकारी हैं। उन्होंने मुखिया के चुनाव से करियर शुरू किया और मुखिया के रूप में अच्छा काम किया। उनको टिकट देने से अच्छी चर्चा हुई है। राजद की सहयोगी कांग्रेस ने शरद यादव की बेटी सुभाषिणी यादव को टिकट दिया है। वे भी पढ़ी-लिखी हैं और इसका भी सकारात्मक मैसेज है।

राजद और कांग्रेस के रितु जायसवाल व सुभाषिणी यादव के जवाब में भाजपा और जदयू की ओर से श्रेयसी सिंह और शालिनी मिश्रा को उतारा गया है। श्रेयसी सिंह राष्ट्रीय स्तर की शूटर हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की बेटी हैं। शालिनी मिश्रा सीपीआई से चार बार सांसद रहे कमला मिश्र मधुकर की बेटी हैं और वे भी बाहर से पढ़ी-लिखी हैं। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ कर आईं पुष्पम प्रिया चौधरी अपनी पार्टी बना कर चुनाव लड़ रही हैं।

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