मनोज झा के जरिए राजद का मैसेज

राज्यसभा सांसद मनोज झा राष्ट्रीय जनता दल के लिए तुरूप का पत्ता हैं। उनके जरिए पार्टी ने सबसे पहले अपनी राजनीति बदलने का मैसेज दिया था। 2018 में जब उनको राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया तो पहली बार राजद ने यह ठोस संकेत दिया कि वह सिर्फ पिछड़ा राजनीति करने वाली पार्टी नहीं है। एक पढ़े-लिखे, बौद्धिक ब्राह्मण को राज्यसभा में भेज कर यह संकेत दिया गया कि लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के नेतृत्व में जो राजनीति होती रही है, तेजस्वी उसको बदल रहे हैं। वे समावेशी राजनीति करेंगे। मनोज झा के राज्यसभा सांसद बनने के बाद राजद में बहुत बदलाव हुए। पार्टी ने उन जातियों को अपने साथ जोड़ा, जिनको पहले राजद का बैरी माना जाता था।

राजद को समावेशी राजनीति की ओर ले जाने में निश्चित रूप से मनोज झा की भूमिका रही है। अब विपक्ष की ओर से उनको राज्यसभा उप सभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाना भी बिहार की राजनीति के लिहाज से बड़ा संदेश है। सत्तापक्ष की ओर से जदयू के हरिवंश नारायण सिंह उप सभापति के उम्मीदवार हैं और विपक्ष ने साझा तौर पर मनोज झा को उम्मीदवार बनाया है। यह राजनीति बिहार में नए किस्म के ध्रुवीकरण को संभव बना सकती है। यह संभव है कि अगड़ी जातियों का वोट बंटे। ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता भाजपा-जदयू के बंधुआ वोटर की तरह बरताव न करके स्वतंत्र रूप से फैसला करें। पढ़े-लिखे नौजवान मतदाताओं में भी इसका असर होगा। पहले जो काम शिवानंद तिवारी के जरिए करने का प्रयास कया गया था वह इस काम इस बार मनोज झा के जरिए हो सकता है।

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