क्या नीतीश कन्हैया को प्रमोट कर रहे हैं? - Naya India
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क्या नीतीश कन्हैया को प्रमोट कर रहे हैं?

बिहार में 27 फरवरी को सीपीआई की संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ रैली है। कम्युनिस्ट पार्टियों की पहले भी रैलियां होती रही हैं पर उनको लेकर इतनी हाइप नहीं बनती थी, जितनी इस बार बनी है। इसका कारण सीपीआई के नेता और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार हैं। इस रैली के लिए कन्हैया ने बड़ी मेहनत की है। उन्होंने बिहार के सभी 38 जिलों में रैलियां कीं और उसके बाद लोगों को जोड़ते हुए पटना पहुंचे। खबर है कि जिस दिन पश्चिम चंपारण के भितिहरवा में गांधी आश्रम में उनकी पहली रैली थी उस दिन पुलिस ने उनको सभा करने की इजाजत नहीं दी। उनको जिला छोड़ने का आदेश दे दिया गया। पर थोड़ी ही देर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीधे एसपी को हड़काया और सभा करने की अनुमति देने और कन्हैया को सुरक्षा देने का निर्देश दिया।

उसके बाद हर जगह कन्हैया को सभा करने की अनुमति मिली और पूरी सुरक्षा भी मुहैया कराई गई। ध्यान रहे नीतीश कुमार का कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ अच्छा सद्भाव रहा है। 2014 में जब वे अकेले लोकसभा का चुनाव लड़े थे तब उन्होंने दो सीटें सीपीआई के लिए छोड़ी थी। भाजपा के साथ होने के बावजूद उनका पुराना सीपीआई का प्रेम जगा है तो यह अनायास नहीं है। इसके पीछे उनकी कोई गहरी राजनीति है। हैरान करने वाली बात यह है कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के भी कन्हैया को प्रमोट करने की खबरें हैं। इसका भी कोई बड़ा राजनीतिक मतलब अगले कुछ दिन में निकलेगा।

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