chirag paswan tejashwi yadav चिराग के लिए राजद आसान नहीं
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चिराग के लिए राजद आसान नहीं

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लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने राजद के नेता और बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इसके बाद दोनों पार्टियों में तालमेल होने की अटकलें तेज हो गईं। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से कई बार ऐसी अटकलें लगाई जा चुकी हैं। दोनों युवा नेता एक-दूसरे की तारीफ करते रहते हैं। इसके बावजूद बिहार के राजनीतिक हालात को देखते हुए दोनों का एक साथ आना मुश्किल लग रहा है। वैसे भी चिराग पासवान की भाजपा से उम्मीदें पूरी तरह से खत्म नहीं हुई हैं। उनको देर-सबेर भाजपा के साथ ही राजनीति करनी है। उन्हें दिल्ली में 12, जनपथ का बंगला भी बचाना है, जहां उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता की एक मूर्ति भी लगवा दी है। (chirag paswan tejashwi yadav)

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असलियत यह है कि अगर वे राजद के साथ जाते हैं तो उनकी मुश्किलें कई तरह से बढ़ सकती हैं। साथ ही राजनीतिक भविष्य बहुत अच्छा नहीं रहेगा। रामविलास पासवान पहले राजद के साथ अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहते लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान ने कांग्रेस को छोड़ कर आपस में तालमेल कर लिया था और 2009 का लोकसभा चुनाव व 2010 का विधानसभा चुनाव साथ लड़ा था। लोकसभा चुनाव में पासवान की पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी वे खुद भी चुनाव हार गए थे। विधानसभा में भी पासवान की पार्टी चार सीटों पर सिमट गई थी और लालू की पार्टी को भी सिर्फ 22 सीटें मिली थीं। असल में राजद का कोर वोट यादव है और लोजपा का पासवान। इन दोनों के बीच सामाजिक स्तर पर ऐतिहासिक रूप से टकराव रहा है और दूसरे इन दोनों के साथ आने से अन्य जातियों में ज्यादा सघन ध्रुवीकरण होता है। तभी ऐसा लग रहा है कि भाजपा पर दबाव डालने के लिए उन्होंने तेजस्वी से मुलाकात कर एक मैसेज दिया है।

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