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तेजस्वी से लड़ना चाहती है भाजपा

Tejashwi yadav mandal politics

भारतीय जनता पार्टी बिहार में नीतीश कुमार से नहीं लड़ सकती है। तभी प्रदेश के नेता अब मांग कर रहे हैं कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। सोचें, कहीं किसी विपक्षी पार्टी ने आज तक ऐसी मांग की होगी कि गठबंधन में किसको मुख्यमंत्री बनना चाहिए? अगर बिहार के हालात खराब हैं और जहरीली शराब पीने से हुई मौतों को लेकर भाजपा मुख्यमंत्री के इतने खिलाफ है तो वह मांग कर सकती है कि नीतीश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव कराएं। उनको शराबबंदी के फैसले पर चुनाव लड़ने की चुनौती भाजपा दे सकती है। लेकिन इसकी बजाय भाजपा चाहती है कि नीतीश कुमार इस्तीफा देकर राजद के नेता और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सीएम बना दें।

यह बहुत दिलचस्प संयोग है कि भाजपा ने रविवार को यह मांग उठाई और उससे दो दिन पहले चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके ने यह बात कही। इस समय बिहार में सुराज यात्रा कर रहे प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार को साल 2025 तक इंतजार नहीं करना चाहिए। उनको अभी तुरंत इस्तीफा देकर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। उनका यह बयान नीतीश कुमार के इस बयान के बाद आया कि 2025 में महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा।

यह भी हैरान करने वाली बात है कि एक महीने पहले प्रशांत किशोर ने कई बार तेजस्वी की शैक्षणिक योग्यता का सवाल उठाया और लोगों के बीच कहा कि वे नौंवी पास हैं और उनकी एकमात्र योग्यता यह है कि वे लालू प्रसाद के बेटे हैं। सोचें, कहां तो प्रशांत किशोर को इस बात पर आपत्ति थी कि तेजस्वी कैसे उप मुख्यमंत्री बन गए हैं और अब वे चाहते हैं कि नीतीश कुमार को उनको अभी मुख्यमंत्री बना दें! पीके ने पहले आइडिया दिया और उसके बाद भाजपा इसकी मांग करने लगी तो इसका क्या कारण है? ऐसा लग रहा है कि दोनों नीतीश की बजाय तेजस्वी से लड़ाई आसान मान रहे हैं।

प्रशांत किशोर और भाजपा दोनों को लग रहा है कि अगर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बना दिया गया तो उनके खिलाफ बाकी सभी जातियों को एकजुट किया जा सकेगा। बिल्कुल उत्तर प्रदेश जैसे हालात बन जाएंगे, जहां अखिलेश यादव के साथ सिर्फ यादव और मुस्लिम हैं। जिस तरह उत्तर प्रदेश में अखिलेश के साथ यादव और मुस्लिम मिला कर 30 फीसदी वोट है उसी तरह बिहार में तेजस्वी के पास 30 फीसदी वोट होगा और उनके लिए नया वोट जोड़ना मुश्किल हो जाएगा। दूसरे, उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके माता-पिता यानी राबड़ी देवी और लालू प्रसाद के कथित जंगल राज का मुद्दा बनाना भी आसान हो जाएगा। इसमें सफलता कितनी मिलेगी यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन भाजपा अपने लिए इसे बहुत अनुकूल मान रही है।

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