बिहार में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की परीक्षा

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने दागी या अपराधी छवि के नेताओं को लेकर एक दिशा-निर्देश दिया। इसके मुताबिक पार्टियों को यह बताना होगा कि वे क्यों किसी दागी नेता को टिकट दे रहे हैं। उसके आपराधिक रिकार्ड की जानकारी वेबसाइट पर शेयर करनी होगी। अदालत ने यह भी कहा है कि सिर्फ चुनाव जीतने की क्षमता ही किसी को टिकट देने का आधार नहीं हो होना चाहिए। इन दिशा-निर्देशों की परीक्षा बिहार चुनाव में होगी। यह परीक्षा दो तरह से होगी। पहले पार्टियों की और फिर मतदाताओं की।

ध्यान रहे बिहार में अलग अलग पार्टियों से आपराधिक छवि के अनेक नेता चुनाव जीते हुए हैं। कुछ नेता निर्दलीय भी चुनाव जीते हैं। सो, यह देखना है कि पार्टियां अदालत के दिशा-निर्देश का सम्मान करती हैं या चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर टिकट देती हैं। वैसे पार्टियों ने बचाव का एक रास्ता पहले से निकाल लिया है। वे आपराधिक छवि वाले नेताओं के परिवार के किसी सदस्य को टिकट देते हैं। जैसे लोक जनशक्ति पार्टी ने बाहुबली नेता सूरजभान के भाई को टिकट दे दिया तो राष्ट्रीय जनता दल ने शहाबुद्दीन की पत्नी को टिकट दे दिया। इस झीने से परदे की आड़ में भाजपा, जदयू, कांग्रेस, राजद, लोजपा सारी पार्टियां उम्मीदवार उतारती हैं। इस बार देखना है कि पार्टियां क्या करती हैं और बिहार के मतदाता क्या करते हैं। आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहला चुनाव बिहार में ही होने वाला है।

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